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बैजनाथ, जेएनएन। उज्जैन के बाद देश के दूसरे सबसे बड़े महाकाल मंदिर में पांचवें शनिवार को भक्‍तजनों का खूब सैलाब उमड़ा। मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खोल दिए गए। उस समय मंदिर में भक्त जुटना शुरू हो गए। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया भक्तजनों की संख्या बढऩे लगी। मंदिर के अंदर बने तालाब में नहाकर भक्त सीधे मंदिर पहुंचे और शनि शिला पर तेल, काले तिल और काला कपड़ा चढ़ाकर शनि की पूजा की। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा और ऐतिहासिक मंदिर है।

इसके बाद शनि शिला के साथ शनि भगवान के दर्शन किए। मान्यता है कि काले महीने में शनि शिला पर तेल, तिल, माश और काला कपड़ा चढ़ाने से शनि भगवान खुश होते हैं और ग्रहों की शांति होती है। मंदिर के आसपास सात कुंड हैं और मान्यता है कि यहां सप्तऋषियों ने तपस्या की थी। चार कुंड मंदिर के अंदर और तीन बाहर हैं। इस मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां शिवलिंग पर जब दूध चढ़ाया जाता है तो वह बाहर नहीं आता है। मान्यता है कि भोले शंकर खुद इस दूध को पीते हैं।

शिव कुंड के पानी से शिवलिंग का अभिषेक होता है, जबकि ब्रह्म कुंड का पानी पीने के काम आता है। सत्ती कुंड के पानी का कहीं भी उपयोग नहीं होता है। इस महीने में इस बार पांच शनिवार मनाए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने मेलों की सफलता के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात किए हैं।

Posted By: Rajesh Sharma

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