कांगड़ा, रितेश ग्रोवर। श्री बज्रेश्वरी देवी की पिंडी का 18 क्विंटल मक्खन के साथ श्रृंगार किया गया। अदभुत व अलौकिक नजारा देखने के लिए बुधवार को करीब 15 हजार श्रद्धालु मंदिर में नतमस्तक हुए। शक्तिपीठ बज्रेश्वरी देवी मंदिर में घृत मंडल पर्व शुरू होते ही माता के दरबार में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ना शुरू हो गया है। पहले दिन मक्खन रूपी पिंडी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में हाजरी भरी। आगामी छह दिन तक श्रद्धालुओं का हुजूम माता के दरबार में लगा रहेगा।

वहीं मक्खन से श्रृंगार का कार्य बुधवार सुबह पांच बजे समाप्त हुआ और उसके बाद माता की आरती हुई। देर रात तक मंदिर परिसर में चले भगवती जागरण को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु जुटे। माता की पिंडी पर मक्खन का लेप लगाने का कार्य मंगलवार शाम करीब सात बजे शुरू हो गया और रात बारह बजे तक मक्खन का कार्य चलता रहा। इसके बाद पिंडी को मेवों के साथ सजाया गया। पूरे वर्ष में शक्तिपीठ माता बज्रेश्वरी देवी मंदिर का दरबार घृत पर्व को लेकर एक दिन पूरी रात खुला रहता है।

इस बार श्रद्धालुओं द्वारा 26 क्विंटल से ज्यादा देसी घी दान में दिया था। लेकिन 24 क्विंटल देसी घी से ही मक्खन बनाया जा सका। वही इस धार्मिक एतिहासिक आयोजन को लेकर श्रद्धालु दूर दूर से कांगड़ा मंदिर पहुंचे थे। घृत पर्व के आयोजन को लेकर किए गए भगवती जागरण ने भी श्रद्धालुओं को आस्था के समुंदर में डूबा दिया। भगवती जागरण सहारनपुर के श्रद्धालु द्वारा किया गया।

मक्खन चढ़ाने की पद्धति का नजारा को देखने के लिए देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। मंदिर सहायक आयुक्त व उपमंडल अधिकारी कांगड़ा जतिन लाल ने बताया मंदिर में घृत पर्व का आयोजन सफल व शांति पूर्ण रहा है।

माता के श्रृंगार में लगे पांच घंटे

माता की पिंडी पर चढ़ाए गए लगभग 18 क्विंटल मक्खन से श्रृंगार करने में लगभग पांच घंटे का समय लग गया। माता के श्रृंगार में काजू, बादाम, मेवे, अखरोट, बड़ी इलायची, काली मिर्च सहित कई मेवों से श्रृंगार किया जाता है और लगभग आधा दर्जन पुजारियों के दल द्वारा माता की पिंडी का श्रृंगार किया। पिंडी पर चढ़ाए गए मक्खन की साज सजावट देखने योग्य बनती है।

अब एक सप्ताह नहीं मिलेगा माता का चरणामृत

श्री बज्रेश्वरी देवी की पावन पिंडी पर घृत पर्व पर मक्खन चढ़ाए जाने से अब एक सप्ताह तक माता जी का स्नान नहीं किया जाएगा, जिससे अब श्रद्धालु एक सप्ताह तक माता का चरणामृत नहीं प्राप्त नही कर पाएंगे।

भद्रकाली, एकादशी व स्थापित सिंहवाहनी पर भी चढ़ाया गया मक्खन

माता श्री बज्रेश्वरी देवी के मंदिर में तीन रूपों में पूजा होती है। मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सुशील कुमार व पंडित अरुण कुमार ने बताया माता की पिंडी के साथ भद्रकाली व एकादशी की पिंडी पर भी मक्खन चढ़ाया गया है, जबकि स्थापित सिंह वाहनी की पिंडी पर भी मक्खन से श्रृंगार किया गया है।

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