धर्मशाला, मुनीष गारिया। घोषणा के बाद से विवादास्पद हुई दूसरी बार प्री बोर्ड परीक्षा के पहले ही पेपर में विवाद हो गया है। जिला कांगड़ा में सोमवार को हुई जमा दो की प्री बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र में गलतियों में भरमार रही। इससे परीक्षार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही परीक्षा करवाने वाले शिक्षा विभाग व पेपर सेट करने वाले जिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। पहली बार प्री बोर्ड परीक्षा होने के बाद डीसी कांगड़ा के निर्देश पर दूसरी दफा परीक्षा का संचालन किया जा रहा है।

इस संबंध में घोषणा होने के साथ ही विरोध भी शुरू हो गया था, बावजूद तीन फरवरी से परीक्षाएं शुरू हो गईं। सोमवार को दसवीं का गणित और जमा दो की अंग्रेजी विषय की परीक्षा थी। अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में त्रुटियों की भरमार पाई गई है।

ये थी गलतियां

  • प्रश्नपत्र में प्रश्न संख्या एक (कॉम्प्रिहेंशन) में विद्यार्थियों को दिए गए पैराग्राफ को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर देने थे। पैराग्राफ से नीचे प्रश्न ख और ग ऐसे पूछे थे, जिनके पैराग्राफ में उत्तर ही नहीं थे।
  • प्रश्नपत्र 85 अंकों का होता है, लेकिन सभी 12 प्रश्नों के अंक जोडऩे पर सिर्फ 76 ही बन रहे थे।
  • लिट्रेचर भाग में प्रश्न आठ और नौ के अंकों में नियमों के अनुसार बदलाव भी किया जाए तो प्रश्नपत्र 85 की बजाय 87 अंकों पर पहुंच रहा है।
  • प्रश्न पत्र में कॉम्प्रिहेंशन में व्याकरणीय गलतियां भी पाई गई हैं।

डाईट सेट करता है प्रश्नपत्र

प्री बोर्ड की घोषणा के बाद डाईट को प्रश्नपत्र तैयार करने के आदेश जारी किए गए थे। डाईट की ओर से प्रश्नपत्र सेट कर सभी स्कूलों को प्रश्नपत्रों की मास्टर कॉपी ईमेल से भेजी गई। स्कूल मुखिया को इसके ङ्क्षप्रट निकालने के लिए कहा गया था।

दसवीं का हिंदी का प्रश्नपत्र भेज दिया अधूरा

बुधवार को दसवीं कक्षा की हिंदी विषय की परीक्षा है। हैरानी की बात यह है कि डाईट ने प्रश्नपत्रों की मास्टर कॉपी का एक पन्ना नहीं भेजा है। इस गलती का आभास होने के बाद स्कूलों को इस संबंध में ईमेल की गई है। जिन स्कूलों में इंटरनेट की समस्या होगी, वहां तो बच्चों को अधूरा ही प्रश्नपत्र मिलेगा।

क्‍या कहते हैं अधिकारी व शिक्षक संघ

  • वार्षिक परीक्षाओं के दौर में दोबारा प्री बोर्ड का निर्णय ही गलत था। अब अंग्रेजी का प्रश्नपत्र भी ऐसा डाल दिया था कि परीक्षार्थी परेशान हो गए हैं। अधूरी तैयारी से परीक्षा संचालन का क्या औचित्य है। -नरेश कुमार, जिलाध्यक्ष राजकीय अध्यापक संघ, कांगड़ा।
  • स्कूलों को डेटशीट के हिसाब से परीक्षा संचालन के आदेश दिए हैं। प्रश्नपत्र डाईट की ओर से सेट कर सीधे स्कूलों को भेजे जाते हैं। अगर प्रश्नपत्रों में गलतियां हैं तो इस संबंध में चर्चा कर हल निकाला जाएगा। -गुरदेव सिंह, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, कांगड़ा।
  • समय कम होने के कारण प्रश्नपत्र सेट करने के बाद प्रूफ रीडिंग का समय भी नहीं मिल पाया है। प्रश्नपत्र भेजने के साथ ही स्कूल मुखियों को सुझाव देने के लिए कहा गया था। हिंदी का प्रश्नपत्र अधूरा जाने का पता चलने पर स्कूलों को अपने स्तर पर काम करने के लिए कहा है। ईमेल और बीआरसी के माध्यम से इस बाबत सूचना स्कूल मुखियों को भेज दी है। -विनोद चौधरी, प्रधानाचार्य, डाईट।

Posted By: Rajesh Sharma

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