खुशी राम ठाकुर, बरोट

छोटा भंगाल व चौहार घाटी में प्रतिवर्ष की भांति लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। सोमवार सुबह लोगों ने कुल देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद घरों में स्वादिष्ट पकवान, राजमाह व खिचड़ी बनाकर संबंधियों व पड़ोसियों के साथ मिल बैठकर खाने का आनंद लिया। दोनों घाटियों में लोहड़ी पर्व करीब एक सप्ताह तक मनाया जाएगा। छोटा भंगाल घाटी की लोहड़ी मकर संक्रांति के दिन सुबह बड़ों के चरण छूकर व गले मिलने से शुरू होती हैं। लोग मकर संक्रांति के दूसरे दिन से लेकर छह-सात दिन तक गांवों में 10 से 15 परिवार एकत्रित होकर खाने-पीने की सामग्री एक चुनिंदा घर में लाते हैं तथा गांव के सारे लोग खूब मस्ती करते हैं। चौहार घाटी में लोहड़ी मनाने का ढंग कुछ हटकर है। इस घाटी के लोग लोहड़ी के पर्व को मकर संक्रांति की पहली रात व मकर संक्रांति के दिन ही स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं तथा मकर संक्रांति की सुबह सबसे पहले कुल देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद खिचड़ी बनाकर सगे संबंधियों तथा पड़ोसियों के साथ मिलकर आनंद उठाते हैं। तीसरे दिन कुछ गांवों में कोलू-कोलू का लोकल त्योहार भी मनाया जाता हैं। कोलू-कोलू के दिन गांव के सभी लोग घरों में आटे के छोटे गोले बनाकर एक चु¨नदा घर के आंगन में एकत्रित होते हैं तथा गांव के हर परिवार की एक महिला आंगन में ऊंचे से स्थान पर खड़े होकर आंगन में खड़े लोगों पर कोलू-कोलू का राग लगाकर गोले फेंकती है। मान्यता है कि इस दौरान जो व्यक्ति जितने ज्यादा गोले पकड़ता है, भविष्य के लिए उसे तथा उसके परिवार को ज्यादा सुख-शांति प्राप्त होती है।

Posted By: Jagran

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