शिमला, प्रकाश भारद्वाज। हिमाचल प्रदेश में जून माह में आठ लाख लोग सस्ते राशन से वंचित हो जाएंगे। ये लोग अंतिम बार राशन के सरकारी डिपो से राशन ले रहे हैं। लेकिन सरकार की घोषणा के बावजूद विधायकों से सस्ते राशन का मोह नहीं छूटा है। विधायक उपदान के तहत मिलने वाला अनाज नियमित तौर पर घर ला रहे हैं। लिखित तौर पर अभी तक 53 लोगों की ओर से सस्ता राशन छोडऩे की जानकारी है। इसमें 12 लोग आम लोग है, जबकि शेष मंत्री और विधायक हैं।

मौजूदा विधानसभा के मंत्रियों की ओर से राशन छोडऩे की जानकारी अपने गृह जिला खाद्य नियंत्रक को अब तक नहीं दी गई है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने 2018 में विधानसभा सत्र के दौरान मंत्रियों को सस्ता राशन छोडऩे की हिदायत की थी। सस्ते राशन से वंचित होने वाले डेढ़ लाख राशनकार्ड धारकों के बाहर निकलने से सरकार को सालाना 71 से 75 करोड़ रुपये की बचत संभावित है।

मंत्रियों ने नहीं भरा फार्म

सस्ता राशन छोडऩे के लिए किसी को भी जिला खाद्य नियंत्रक कार्यालय की ओर से जारी होने वाला फार्म भरना था, लेकिन मंत्रियों की ओर से सभी जिला खाद्य नियंत्रकों के पास इस तरह का घोषणा पत्र नहीं पहुंचा है। हो सकता है कि मंत्रियों ने राशन लेना छोड़ दिया हो, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा के अधिकांश विधायक भी सस्ता राशन ले रहे हैं। सस्ता राशन छोडऩे की घोषणा विपक्षी कांग्रेस ने भी की थी।

50 हजार वेतन लेने वाला भी बाहर

सरकारी नौकरी करने वाला वरिष्ठ लिपिक 50 हजार मासिक वेतन लेता है और आयकर के दायरे में आता है। लिपिक से लेकर 2.25 लाख रुपये मासिक वेतन लेने वाले मुख्य सचिव और उनके समकक्ष वेतन लेेने वाले अधिकारी आयकर के दायरे में हैं। ऐसे में डेढ़ लाख आयकर भुगतान करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ कुल 8 लाख लोग सस्ते राशन से बाहर होंगे।

सस्ते राशन के आंकड़े

  • गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों की कुल संख्या 6.80 लाख
  • गरीबी रेखा से ऊपर आने वाले परिवारों की कुल संख्या 11.70 लाख
  • आयकर भुगतान करने वाले डेढ़ लाख परिवार बाहर होने के बाद 10.20 लाख

Posted By: Rajesh Sharma

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