कांगड़ा, रितेश ग्रोवर। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के बाद दावे खोखले साबित हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि रविवार देर रात टांडा अस्पताल में प्रसव पीड़ा से कराह रही तीन महिला मरीजों के खून की जांच के लिए तीमारदारों को सिविल अस्पताल कांगड़ा भेज दिया। इससे भी बड़ी बात यह है कि कांगड़ा अस्पताल में भी खून की जांच नहीं हो पाई और परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

सोमवार देर रात सिविल अस्पताल कांगड़ा की लैब के बाहर कुछ लोग हाथ में ब्लड सैंपल लेकर दरवाजा खटखटा रहे थे लेकिन न तो लैब का दरवाजा खुला और न ही किसी कर्मचारी ने इन लोगों की बात सुनी। टांडा मेडिकल कॉलेज की लैब में किसी दिक्कत का हवाला देते हुए तीनों तीमारदारों को यह कहकर भेजा था कि वे सिविल अस्पताल कांगड़ा की लैब से ब्लड सैंपल की जांच करवाकर रिपोर्ट लाएं। करीब 11 बजे तीमारदार कांगड़ा उपमंडलीय चिकित्सालय तो पहुंच गए पर खून की जांच नहीं हो पाई।

रेहलू निवासी संजय कुमार, हरसीपत्तन के हंसराज और नगरोटा बगवां के राजकुमार ने बताया कि उनके परिवार की सदस्य महिलाएं टांडा अस्पताल में प्रसव पीड़ा से कराह रही हैं और उनके खून की जांच नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि टांडा अस्पताल मेंं लैब की मशीन खराब होने के कारण सिविल अस्पताल भेजा है लेकिन यहां भी लैब रूम बंद होने से परेशानी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वे आधी रात को जाएं तो कहां जाएं। उधर, इस बाबत मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉक्टर सुरेंद्र भारद्वाज ने अगर ऐसा हुआ तो जांच की जाएगी।

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Posted By: Rajesh Sharma

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