टांडा, जेएनएन। प्लास्टिक के कवर से टेप लगाकर पेट को बंद करने की कोशिश की गई है, ताकि आंतड़ियां बाहर न आ सकें। कर्म चंद (68) की ऐसी हालत करीब एक माह से है। टांडा मेडिकल कॉलेज के सर्जरी वार्ड में भर्ती कर्म चंद को चिकित्सक बचाने की कोशिश कर रहे हैं। रोज पांच हजार रुपये का इंजेक्शन लग रहा है ताकि पेट में पड़ी पस सूख जाए और दोबारा टांके लगाकर कर्म चंद की जान बचाई जा सके। कर्म चंद के परिवार के लिए संकट पैसे का है।

मनरेगा के तहत बने हेल्थ कार्ड में सिर्फ 1500 रुपये बचे हैं। बाकी लगभग 28500 रुपये निजी अस्पताल ने उड़ा लिए हैं। टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन रोगी कल्याण समिति के तहत जो मदद कर सकता था, की गई है। लेकिन यह भी ऊंट के मुंह में जीरा के समान ही थी। सर्जरी विशेषज्ञ ने बताया कि 25 जुलाई से कर्मचंद को टांडा में भर्ती किया गया है। पेट में पड़ी पस को सुखाने के लिए तीसरे दिन उन्हें इंजेक्शन लगाया जा रहा है। ठीक होने में समय लगेगा। इस पर करीब 50 हजार रुपये का खर्च आएगा। उधर, कर्म चंद के बेटे सुरजीत ने बताया कि उन्होंने सहायता के लिए नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया से गुहार लगाई। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक से बात कर कुछ सहायता तो दिलाई पर यह उतनी नहीं थी कि कर्म चंद का इलाज हो पाए। अब कर्म चंद के परिवार की नजरें सरकार पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष से कुछ सहायता मिल जाए तो कर्म चंद पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।

 यह है मामला

रैहन के परड़ूही गांव के कर्म चंद को अचानक पेट में दर्द हुई तो परिवार के सदस्य 11 जुलाई को उन्हें नूरपुर के एक निजी अस्पताल में ले गए। चिकित्सकों ने भी ऑपरेशन कर दिया। टांके खोलकर उन्हें घर भेज दिया गया, लेकिन वह पूरी रात सो नहीं पाए। जहां ऑपरेशन के लिए चीरा लगाया था वहां से पेट खुल गया था। पेट से निकल रहे पानी से पूरा बिस्तर गीला हो गया। दूसरे ही दिन परिजन उन्हें दोबारा निजी अस्पताल ले आए। 10-12 दिन तक वहां दाखिल रखा। लेकिन जब चिकित्सकों के हाथ खडे़ हो गए तो परिजनों को बताया कि इन्हें टांडा रेफर किया जा रहा है। परिवार के सदस्यों के साथ निजी अस्पताल का एक डॉक्टर डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में कर्म चंद को भर्ती करवा गया है। 25 जुलाई से कर्म चंद टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती है।

कर्म चंद की रोगी कल्याण समिति के माध्यम से जो मदद हो सकती थी की गई है। विधायक राकेश पठानिया को भी फोन आया था। उन्होंने मदद करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

-डॉ. गुरदर्शन गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक टांडा मेडिकल कॉलेज।

अल्सर फटने के कारण कर्म चंद का निजी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था। सही इलाज न होने के कारण पेट खुल गया है। पस भी पड़ गई है, उसे सुखाने के लिए इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। कर्म चंद को पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा। इस पर लगभग 50 हजार रुपये खर्च आएगा।

-डॉ. राजकुमार शर्मा, प्रोफेसर सर्जरी टांडा मेडिकल कॉलेज।