धर्मशाला, नीरज व्यास। यह बिल्कुल सही है कि किस्मत तभी साथ देती है, जब आप मेहनत करते हैं। कांगड़ा की प्रगतिशील किसान शिखा मशरूम उगाकर रोजगार भी पा रही हैं अौर लोगों को मशरूम का स्वाद भी चखा रही हैं। शिखा ने मशरूम के 150 बैग रखे हैं, इनमें वाइट बटन मशरूम लगाया है। यह मशरूम के बैग अब फसल देने लगे हैं, जिससे शिखा काफी खुश हैं। महिला किसान मशरूम के साथ अन्य सब्जियां भी उगा रही हैं, वह एक प्रगतिशील किसान के रूप में उभरी हैं। महिला किसान घर बैठे बेहतर कमाई कर रही है। घर से ही दुकानदार व लोग मशरूम खरीद कर ले जा रहे हैं।

खुद भी उगा रहीं अन्य को भी दे रहीं प्रशिक्षण

महिला किसान शिखा खुद तो मशरूम उगा ही रही हैं। साथ ही साथ अपने अासपास की महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। उन्हें भी स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। शिखा ने अन्य महिलाओं को भी इस स्वरोजगार से जोड़ दिया है। एेसे में वाइट बटन मशरूम, शिटाके मशरूम अादि लगाकर वह अच्छी कमाई कर रही हैं।

अाठ हजार रुपये में लिए हैं 100 मशरूम बैग

अाठ हजार रुपये में 100 बैग अाए हैं। इन बैग के लिए अाठ हजार रुपये खर्च किए हैं। जबकि घर बैठकर मशरूम से दस हजार रुपये अभी अभी कमा चुकी हैं। अभी यह मशरूम के बैग काफी उत्पादन देंगे। इसलिए शिखा अन्य बेरोजगार लोगों को स्वरोजगार के लिए मशरूम लगाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

घर से ही हो जाते हैं मशरूम सेल

शिखा को मशरूम को बेचने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता बल्कि अच्छी गुणवत्ता के मशरूम के लिए लोग उनके घर से ही खरीद कर ले जाते हैं। घर से ही मशरूम बिक्री हो रहे हैं, इससे उन्‍हें मार्केटिंग की कोई चिंता नहीं है।

मशरूम में पा सकते हैं स्वरोजगार

बेरोजगार युवा मशरूम का प्रशिक्षण लेकर इसमें स्वरोजगार पा सकते हैं। कई तरह के मशरूम यहां पर तैयार किए जा सकते हैं। मशरूम सहित अन्य सब्जियों को भी अासानी से तैयार किया जा सकता है। अगर मशरूम को उगाने से पहले प्रशिक्षण लिया जाए तो यह पैदावार को बढ़ा देगा। वैज्ञानिक तरीके से फसल का बेहतर उत्पादन हो सकेगा। इसलिए युवाओं को इस क्षेत्र में अागे अाना चाहिए अौर स्वरोजगार पाना चाहिए। इसमें मशरूम को देखभाल की ही जरूरत है। अगर अापके पास अधिक समय नहीं है तब भी समय तय करके इसका उत्पादन किया जा सकता है।

Edited By: Rajesh Sharma

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