अधूरे शिमला-मटौर फोरलेन का पूरा टोल वसलूने पर रोक, उपभोक्ता आयोग का आदेश; अगली सुनवाई तक 100 रुपये नहीं लगेंगे
कांगड़ा उपभोक्ता आयोग ने शिमला-मटौर फोरलेन पर घट्टा टोल प्लाजा पर बढ़ी हुई टोल दरों पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

शिमला-मटौर फोरलेन पर घट्टा टोल प्लाजा पर नई दरें वसूलने पर रोक लगा दी गई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
घट्टा टोल प्लाजा पर बढ़ी दरों पर रोक।
अब 65/100 रुपये की जगह 25 रुपये टोल।
अधूरे फोरलेन के कारण आयोग का आदेश।
संवाद सहयोगी, देहरा (कांगड़ा)। शिमला-मटौर फोरलेन पर रानीताल के पास घट्टा टोल प्लाजा पर बढ़े हुए टोल शुल्क को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कांगड़ा ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) सहित विपक्षी पक्ष संख्या एक से तीन को अगली सुनवाई तक बढ़ी हुई दरों से टोल वसूलने से रोक दिया है।
अब 100 या 65 नहीं 25 रुपये वसूल होंगे
अब टोल प्लाजा पर एक तरफ की यात्रा के लिए 65 रुपये के बजाय 25 रुपये लगेंगे। 24 घंटे के भीतर वापसी यात्रा के लिए 100 रुपये के बजाय 35 रुपये ही वसूले जा सकेंगे। आयोग ने आदेश का पालन 17 अक्टूबर को ही शाम चार बजे तक सुनिश्चित करने और अनुपालना प्रमाणपत्र ईमेल के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
उपभोक्ताओं की शिकायत पर आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कांगड़ा के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की पीठ ने यह आदेश 17 अक्टूबर 2026 को उपभोक्ता की शिकायत पर सुनाया। यह शिकायत सनी कौंडल सहित चार शिकायतकर्ताओं ने एनएचएआइ और चार अन्य विपक्षी पक्षों के विरुद्ध दायर की है। आयोग ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर, 2026 की तारीख निर्धारित की है।
फोरलेन पूरी तरह से चालू नहीं
शिकायतकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाधा ने पक्ष रखते हुए कहा कि टोल प्लाजा से गुजरने वाले उपभोक्ताओं के सुरक्षा, विकल्प चुनने और जानकारी प्राप्त करने के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि चारों लेन पूरी तरह चालू नहीं हैं और क्षेत्र में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। टोल शुल्क बढ़ाए जाने के बावजूद बालूग्लोआ वाला मार्ग पूरी तरह चालू नहीं है।
देहरा जाने के लिए नहीं वैकल्पिक मार्ग
शिकायत में यह भी कहा गया कि देहरा की ओर जाने वाले यात्रियों के पास वैकल्पिक मार्ग नहीं है और उन्हें इसी सड़क से गुजरने तथा टोल शुल्क चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यात्रियों को सड़क की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में पर्याप्त जानकारी भी नहीं दी जा रही है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ताओं का पक्ष मजबूत दिखाई देता है। टोल प्लाजा से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों और उपभोक्ताओं के गुजरने को देखते हुए आयोग ने माना कि सुरक्षित और उचित सड़क सुविधा सुनिश्चित करना आवश्यक है। आयोग के अनुसार, यदि यात्रियों को सुरक्षित और उचित सड़क सुविधा नहीं मिलती है, तो उन्हें अपूरणीय नुकसान और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दैनिक जागरण ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
सेवा में कमी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख
आयोग ने अपने आदेश में सेवा में कमी के संबंध में प्रथम दृष्टया टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोगिता वाली सड़क सेवाओं की गुणवत्ता, प्रकृति और संचालन में कई कमियां दिखाई देती हैं।
आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया एवं अन्य बनाम ओजे जनीश एवं अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। आयोग ने इस फैसले के संदर्भ में कहा कि टोल शुल्क वसूलने का दायित्व सुरक्षित, निर्बाध और वाहनों के चलने योग्य सड़क उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से जुड़ा है। खराब रखरखाव, गड्ढों और यातायात संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मार्ग पर टोल वसूली के औचित्य का सवाल भी इसी संदर्भ में उठता है।
जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश
आयोग ने विपक्षी पक्ष संख्या चार और पांच की ओर से निर्धारित समय में दाखिल जवाब को रिकॉर्ड पर ले लिया है। वहीं, विपक्षी पक्ष संख्या एक से तीन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर आयोग ने उन्हें अगली सुनवाई से पहले जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
30 अक्टूबर को होगी आगामी सुनवाई
आयोग ने विपक्षी पक्ष संख्या एक से तीन को यह कारण बताने के लिए भी कहा है कि अंतरिम आदेश को मामले के अंतिम निपटारे तक स्थायी क्यों न कर दिया जाए। फिलहाल बढ़ी हुई दरों से वसूली पर रोक अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी। मामले में आगे की स्थिति 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।
