ज्वालामुखी, जेएनएन। अब मां ज्वाला के भक्त ऑनलाइन दर्शन कर सकेंगे। जल्द ज्वालामुखी मंदिर की वेबसाइट बनेगी। ऑनलाइन शयन आरती का प्रसार भी होगा। इसके अलावा लड़कियों की शादी के लिए 11 हजार रुपये मिलेंगे जबकि गरीब परिवार के बच्चों को पांच हजार रुपये मिलते रहेंगे। यह फैसले मंगलवार को सहायक मंदिर आयुक्त एवं एसडीएम राकेश शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए हैं। बैठक में विधायक रमेश धवाला मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हुए।

विधायक रमेश धवाला ने कहा कि मंदिर न्यास की ओर से अधवानी में बनाए गोसदन के निर्माण कार्यो की जांच करवाई जाए। निर्माण कार्य पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। इसलिए जनता को सच्चाई का पता लगना चाहिए। निर्णय लिया गया कि एक भव्य गोशाला का वन विभाग के सहयोग से निर्माण किया जाए। इस मौके पर अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग जीएस राणा, अधिशाषी अभियंता आइपीएच रोहित दुबे, अधिशाषी अभियंता विद्युत मंडल नादौन हिमेश धीमान, डीएसपी योगेश दत्त, तहसीलदार जगदीश चंद शर्मा, मंदिर अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा, सहायक मंदिर अधिकारी अमित गुलेरी, एसडीओ मंदिर शमशेर ¨सह, कनिष्ठ अभियंता सुरेश कुमार, मंदिर न्यास सदस्य एसके शर्मा, कृष्ण स्वरूप शर्मा, जेपी दत्त, प्रशांत शर्मा, शशि चौधरी, त्रिलोक चौधरी, देसराज भारती, मधुसूदन शर्मा मौजूद रहे।

बैठक में लिए गए निर्णय

-मंदिर में शौचालय का इस्तेमाल होगा निशुल्क।

-मंदिर परिसर में एटीएम स्थापित होगी।

-दानी सज्जनों को विशेष आमंत्रित न्यास सदस्य बनाया जाएगा।

-2017 में चुनाव आचार संहिता के दौरान लगाई निविदाएं रद।

-सोना-चांदी को बैंक में रखा जाएगा।

-कूड़ा निष्पादन संयंत्र लगेंगे व नए दानपात्र बनेंगे।

-मंदिर के किरायेदार दुकानदारों को नई दुकानें मिलेंगी।

-मुख्य मंदिर के गुंबद की लीकेज दूर करने का निर्णय।

टेढ़ा मंदिर के कर्मचारियों का वेतन हुआ तीन हजार तारा देवी मंदिर की सीढि़यों का काम, अंबीकेश्वर मंदिर से भैरों बाबा मंदिर मार्ग की टा¨रग, टेढ़ा मंदिर मार्ग का निर्माण शीघ्र होगा। मंदिर कार्यालय को तुरंत मंदिर परिसर में स्थापित किया जाएगा। टेढ़ा मंदिर के कर्मचारियों का वेतन तीन हजार रुपये किया गया। भैरों मंदिर के निर्माण करने, निशुल्क सराय का निर्माण करने, शहंशाह अकबर की नहर का जीर्णोद्धार करने, ध्यानू भक्त की समाधि व मंदिर निर्माण करने बरे निर्णय हुआ। मंदिर के नजदीक नाले का तटीकरण कर सरोवर व झरना बनाने की संभावनाओं को तलाशने का जिम्मा तकनीकी विभाग को सौंपा गया।