ज्वालामुखी, प्रवीण कुमार शर्मा। त्योहारी सीजन में ज्वालामुखी के प्यारु हलवाई की दशकों पुरानी मशहूर सगोत्त कर खूब मांग रहती है। सगोत्त मैदे से बनने वाली बड़े आकार की मठ्ठी जैसा व्यंजन है। सगोत की करवाचौथ, दीपावली व भैयादूज पर अधिक मांग होती है। प्रदेश के कई जिलों में सगोत्त मिलती है लेकिन ज्वालामुखी की मशहूर सगोत्त 60 सालों से हिमाचल, पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़ तक पहचान रखे हुए है। प्यारु हलवाई की सगोत्त इतनी प्रसिद्ध है कि लोग महीना भर पहले आर्डर बुक करवा देते हैं। त्योहरों के बिना पहले आर्डर किए या टोकन लिए आपको सगोत्त नहीं मिलेगी।

प्यारु हलवाई के बेटे श्याम कुमार ने बताया कि उनकी दुकान की शुरुआत दादा बैसाखी राम ने की थी। उन्हीं के समय से सगोत्त लेने के लिए हिमाचल समेत अन्य राज्यों के लोग बुङ्क्षकग करवा देते हैं। दादा के बाद पिता प्यारे लाल ने सगोत्त की गुणवत्ता बरकरार रखते हुए कारोबार आगे बढ़ाया तथा दुकान उनके नाम से मशहूर हो गई। पिता के स्वर्गवास के बाद वे कारोबार संभाले हुए हैं। सगोत्त मैदे से तैयार की जाती है। घी के लेप के साथ कुल आठ तह के साथ इन्हें लंबाई में तैयार करते हैं तथा बाद में काट कर हाथों से गोलाकार में तैयार करके तला जाता है। यह फीकी होती है तथा खाने में खस्ता होने के कारण लाजवाब लगती है।

त्योहारों में बिकती है छह से आठ क्विंटल सगोत्त

श्याम बताते हैं कि शारदीय नवरात्र के बाद सगोत्त बिकना शुरू हो जाती है। करवाचौथ, दीपावली व भैयादूज पर वे छह से आठ क्विंटल सगोत्त बेचते हैं। सगोत्त का एक पीस 25 रुपये का है। उनके दादा के समय इसकी शुरुआत एक रुपये से हुई थी।

प्यारु हलवाई की सगोत्त ज्वालामुखी का एक प्रसिद्ध ब्रांड है। इनका तोड़ किसी अन्य हलवाई के पास नहीं है। त्योहारी सी•ान आते ही सबसे पहले लोग प्यारु हलवाई की सगोत्त की सोचते हैं।

-ज्योतिशंकर शर्मा।

हम कई सालों से सगोत्त खरीद रहे हैं। बचपन में हमारे पिता त्योहारों में इसे घर लेकर आते थे। इनकी विशेषता यह है कि वर्षों से गुणवत्ता में गिरावट नहीं आई बल्कि हर बार स्वाद बढ़ा है।

-सुरेश शर्मा।

हम 15 दिन पहले ही प्यारु हलवाई की सगोत्त के लिए आर्डर बुक करवा देते हैं। दीपावली, भैयादूज पर सगोत्त उनके घरों में न आए सवाल ही नहीं बनता। हम अपने रिश्तेदारों को भी कांगड़ा, नयना देवी तथा अन्य जगहों में सगोत्त भेजते हैं।

-प्रशांत शर्मा, पुजारी

Edited By: Virender Kumar