डाडासीबा, संवाद सूत्र। प्राथमिक सहायक अध्यापकों से नियमित प्रोवेशन में अपनी सेवाएं दे रहे जेबीटी अध्यापकों का कहना है कि पे रिवीजन 2022 का सबसे ज्यादा खमियाजा उनकी तरह ही प्रोवेशन पर सेवाएं दे रहे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को हुआ है। इन कर्मचारियों के लिए पे रिवीजन मात्र पे डिवीजन बन गया है और उनका वेतन बढ़ने की बजाए 3000 रुपये तक कम हो रहा है। इन अध्यापकों पर 15 प्रतिशत वाला विकल्प भी लागू नहीं होता। सरकार व वित्त विभाग द्वारा सुझाये गए तीन विकल्पों में मात्र 2.59 का विकल्प लागू होने से इन अध्यापकों का वेतनमान बढ़ने की बजाय कम हो रहा है।

अध्यापकों में सुरिन्द्र ठाकुर, प्रीतपाल चौहान, अक्षय ,प्रदीप, मनोहर लाल, विनोद, अंकज, सुरजीत इत्यादि का कहना है कि इस वक्त प्रदेश में प्रोवेशन पर सबसे ज्यादा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पंजाब में प्रोवेशन जैसी व्यवस्था न होने और वहां के कर्मचारियों को इनिशियल स्टार्ट मिल जाने के कारण वहां के कर्मचारियों को ऐसा खामियाजा नहीं भुगतना पड़ा है जबकि हिमाचल प्रदेश में 2012 से चली आ रही वेतन विसंगति उनके गले की फांस बन चुकी है।

प्रदेश में प्रोवेशन पर सेवाएं दे रहे जेबीटी अध्यापकों को आज भी 2009 के पे कमीशन अनूरूप वेतन दिया जा रहा है जिससे यह वर्ग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है। इन अध्यापकों का कहना है कि 15 प्रतिशत का विकल्प केवल मात्र 15 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए ही है। प्रदेश सरकार और वित्त विभाग अगर प्रोवेशन पर सेवाएं दे रहे जेबीटी अध्यापकों को नियुक्ति के समय से 2.25 का विकल्प नहीं देते तो शीघ्र ही आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा ।

Edited By: Richa Rana