शिमला, रमेश सिंगटा। हिमाचल प्रदेश को कुदरत ने पर्याप्त जल संसाधन प्रदान किए हैं। राज्य सरकार ने भी अधिकांश बस्तियों को पानी की सुविधा देने का प्रयास किया है। लेकिन, अब हर घर यानी 18 लाख लोगों को पानी के कनेक्शन मिलेंगे। अभी राज्य के पास पेयजल की 11,700 योजनाएं हैं। ऐसा केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन से संभव होगा। इसमें फंड की कोई कमी नहीं रहेगी। इस योजना को पहाड़ी प्रदेश में धरातल पर उतारने की जिम्मेवारी तेजतर्रार आइएएस अफसर अमिताभ अवस्थी के कंधों पर है। वह जल शक्ति विभाग के सचिव हैं। उन्हें किसी भी योजना के बेहतर नतीजे दिलाने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। अवस्थी खुद भी मिशन मोड़ पर कार्य कर रहे हैं। दैनिक जागरण ने उनसे खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश।

शिमला में पांच साल पहले पीलिया 30 से अधिक लोगों की जान ले चुका है। क्या इससे सरकार ने सबक लिया है?

-हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा। जब स्वच्छ जल मिलेगा तो स्वाभाविक तौर पर जल जनित रोगों पर भी काबू पाया जा सकेगा। इस दिशा में भी मिशन की योजना सार्थक रहेगी। शिमला में पीलिया से कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इससे सरकार ने सबक लिया है और स्वच्छ पानी के वितरण में अधिकारियों, कर्मचारियों की जवाबदेही तय की।

जल जीवन मिशन कब तक चलेगा, हिमाचल ने क्या लक्ष्य तय किया है?

-जल जीवन मिशन पूरे देश में चल रहा है। मिशन 2024 तक चलेगा। लेकिन, हिमाचल सरकार ने दो साल पहले ही मिशन के लक्ष्यों को पूरा करने का फैसला लिया है। कार्य की गति काफी तेज रहेगी। तय हुआ है कि लक्ष्यों को जून, 2022 तक पूरा किया जाएगा। योजना पर कुल 3500 करोड़ खर्च होंगे। इसमें 90 फीसद पैसा केंद्र देगा और शेष 10 फीसद राज्य सरकार वहन करेगी।

अब तक कितने कनेक्शन आवंटित किए गए हैं। कोरोना काल में बजट की कमी आड़े नहीं आएगी?

-कोरोना काल में तो जल का महत्व और बढ़ गया है। सुनिश्चित होगा कि पीने के पानी घर के अंदर नल से मिले। इसके लिए पाइपों के माध्यम से तय मानकों के मुताबिक पानी की मात्रा भी मिलेगी। मात्रा की कमी न आए, इसके लिए योजनाएं भी बनेंगी। इससे पानी की मौजूदा मात्रा बढ़ाई जाएगी। एक साल में 2.51 लाख कनेक्शन मिलेंगे और 1.60 लाख कनेक्शन दे चुके हैं। मार्च तक लक्ष्य पार हो जाएगा। बजट की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

दूसरे विभागों के साथ तालमेल स्थापित करने के संबंध में बैठक हुई है?

-ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, वन और राजस्व विभाग के साथ भी जुड़ाव होगा। सभी विभागों के बीच उचित तालमेल स्थापित किया जाएगा। इस वर्ष 400 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुका है। विभाग के कार्यों की केंद्र ने भी सराहना की है। इससे अधिकारियों के मनोबल में बढ़ोत्तरी होनी स्वाभाविक है।

पुरानी योजनाओं के जीर्णोद्वार के लिए प्रस्तावित योजना का क्या स्टेटस है?

-हर योजना की एक निर्धारित अवधि होती है। आमतौर पर योजना की उम्र पंद्रह से बीस साल होती है। खासकर उठाऊ पेयजल योजना की। इस दृष्टि से 2000 से पहले की योजनाएं पुरानी हो चुकी हैं। इनके जीर्णोद्वार की जरूरत है। राज्य सरकार ने 798 करोड़ का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के पास मामला एडवांस स्टेज पर है। एडीबी ने काफी इच्छा जताई है।

वर्षा जल संग्रहण को क्या हर योजना का हिस्सा बनाएंगे...क्या तैयारी है?

-वर्ष जल संग्रहण अब जरूरी होगा। हर योजना का इसे अभिन्न अंग बनाया जाएगा। एनजीटी ने भी पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया है। इस संबंध में हमने ईएनसी से जेई तक की जवाबदेही तय की है। इन्हें हर महीने योजनाओं का निरीक्षण करना होगा। इसके लिए बाकायदा प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया गया है।

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