मंडी, हंसराज सैनी। जिले में बरसात अकसर अगस्त में कहर बरपाती है। विदाई के दौरान मानसून अकसर यहां के लोगों को खून के आंसू रूलाता है। पिछले 10 साल में यहां अगस्त में कई बड़े हादसे हो चुके हैं और जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। जिले की जनता मानसून की सुखद विदाई की उम्मीद लगाए बैठी थी। नौ अगस्त की रात हुई मूसलधार वर्षा ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जुलाई में अकसर शांत रहने वाली बल्ह हलके की सुकेती खड्ड ने फिर रौद्र रूप दिखाया है। डडौर से गुटकर तक खड्ड ने पूरे क्षेत्र को जलमग्न कर दिया है।

12 अगस्त 2017 की रात पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटरोपी का पहाड़ आफत बनकर टूटा था। यहां एचआरटीसी की दो बसें मलबे की चपेट में आने से 49 यात्रियों की दबने से मौत हो गई थी। नौ अगस्त 2014 की रात मानसून ने धर्मपर हलके में कहर बरपाया था। बादल बढऩे से धर्मपुर व अन्य क्षेत्रों में भारी तबाही हुई थी। धर्मपुर बस स्टैंड पर खड़ी कई बसें सोन खड्ड में बह गई थीं। बल्ह हलके के हटनाला में भूस्खलन से एक ट्रक के खाई में गिरने से 45 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा भी अगस्त में यहां कई जानलेवा हादसे हुए हैं। जुलाई में होने वाली वर्षा से यहां के पहाड़ कमजोर हो जाते हैं। अगस्त में होने वाली मूसलधार वर्षा से पहाड़ दरकने शुरू हो जाते हैं। इस कारण जानलेवा हादसे होते हैं।

अवैध खनन से बिगड़ा सुकेती का स्वरूप

सुकेती खड्ड के कहर बरपाने के पीछे सबसे बड़ा कारण अवैध खनन है। अवैज्ञानिक मंडी में हर साल अगस्त में बरसात कहर बरसाती है।

Edited By: Richa Rana