शिमला, यादवेन्द्र शर्मा।

हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन और उपभोक्ता संघ(हिमफेड) बागवानों से मंडी मध्यस्थता योजना (एमआइएस) के तहत 9.50 रुपये प्रति किलो की दर से सेब खरीदकर 2.85 रुपये में बेच रहा है। इससे हिमफेड को लाखों को नुकसान हो रहा है, जबकि उत्पाद तैयार करने से लाखों रुपये का मुनाफा हो सकता है। प्रति किलो की दर से 6.65 रुपये का नुकसान हो रहा है। यही नहीं हिमफेड के सेब खरीद केंद्रों से परवाणू तक ढुलाई का अलग खर्च आ रहा है। यहां इसे खुली नीलामी में बेचा जा रहा है। उधर, एचपीएमसी बागवानों से सेब खरीदकर उत्पाद तैयार कर बेच रहा है।

प्रदेश में हिमफेड के 127 सेब खरीद केंद्रों से लाखों रुपये खर्च कर सेब को परवाणू तक पहुंचाया जा रहा है। हिमफेड अभी तक 15650.42 मीट्रिक टन सेब की खरीद कर चुका है। 4.47 लाख बोरियों में सेब खरीदा गया है। एक बोरी मे करीब 37.50 किलो सेब खरीदा जाता है। कई-कई दिन ट्रांसपोर्ट न करने से भी सेब खराब हो रहा है। इसके अलावा कई जगह बागवान खराब सेब बोरियों में डाल देते हैं।

शुरू में 1.65 रुपये प्रति किलो बेचा सेब

हिमफेड ने इस सेब सीजन के शुरू में 9.50 रुपये प्रति किलो की दर से बागवानों से सेब परवाणू में 1.65 रुपये में बेचा। जो अब कुछ दिन से 2.85 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है।

सेब के सडऩे से बनती है शराब और विनेगर

शराब और विनेगर तभी तैयार होता है जब सेब सड़ता है। खराब सेब आने के बाद भी इसके उत्पाद तैयार कर मुनाफा कमाया जा सकता है। अच्छे सेब से कंसंट्रेट यानी गाढ़ा जुस, जैम चटनी और जैली तैयार कर बेची जा सकती है।

सेब खरीद केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। बोरियों में कम तोल भी आ रहा था। इस संबंध में निर्देश दिया है। पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। खरीद केंद्रों से हर दिन खरीदे सेब को उठाने का निर्देश है।

-गणेश दत्त, अध्यक्ष, हिमफेड।

अब तक 15650.42 मीट्रिक टन सेब एमआइएस के तहत बागवानों से खरीदा गया है। परवाणू में पारदर्शिता के तहत नीलामी कर औसत 2.85 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है।

-केके शर्मा, प्रबंध निदेशक, हिमफेड।

Edited By: Virender Kumar