यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 27, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अब हिमालयन गद्दी यूनियन ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
गद्दी समुदाय ने सरकार के खिलाफ मांग न मानने पर मोर्चा खोल दिया है। यूनियन के पदाधिकारियों ने सरकार को ...और पढ़ें

धर्मशाला,संवाद सहयोगी। अब हिमालयन गद्दी यूनियन हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मांग न मानने पर मोर्चा खोल दिया है। यूनियन के पदाधिकारियों ने सरकार को चेताया है कि यदि 15 मई तक गद्दी समुदाय की वंचित उपजातियों के साथ गद्दी शब्द जोड़ने को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की गई तो यूनियन सड़क पर उतर आएगी और इसके लिए सरकार ही जिम्मेवार होगी।
धर्मशाला में पत्रकारों को संबोधित करते हुए हिमालयन गद्दी यूनियन हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष मोहिंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कई सालों से यूनियन गद्दी समुदाय की वंचित उपजातियों के साथ गद्दी शब्द जोड़ने की मांग उठाती आई है। लेकिन गद्दी समुदाय की छह वंचित उपजातियों से संबंधित राजस्व रिकार्ड को दुरुस्त नहीं किया गया। वंचित उपजातियों में सिप्पी, हाली, वाड़ी, डोगरी, रिहाड़े व डागी के गद्दी शब्द नहीं जोड़ा गया है। वंचित उपजातियों के सभी रीति-रिवाज, संस्कृति, पहनावा व रहन-सहन भी एक समान है।उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को इस संबंध में 2019 को ज्ञापन सौंपा गया था। जिसके बाद इस विषय की जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए थे। जिस पर राजस्व रिकार्ड को दुरुस्त किए जाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि यूनियन किसी भी आरक्षण की मांग नहीं उठा रही है और न ही आयोग बनाने की मांग है, लेकिन सरकार की ओर से की गई छानबीन के बाद भी क्यों अधिसूचना जारी नहीं की जा रही?
इस मामले में उपायुक्त कांगड़ा ने भी जांच की और उसमें पाया गया कि गद्दी शब्द उक्त उपजातियों के साथ जोड़ना सही है। तीन-तीन बार रिपोर्ट जाने के बाद, गद्दी कल्याण बोर्ड की बैठक में भी प्रस्ताव पारित होने इस पर सरकार अधिसूचना जारी नहीं कर रही, जिससे यूनियन पदाधिकारियों में रोष है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा व चंबा जिला के 10 विधानसभा क्षेत्रों में अधिक संख्या में उपजातियों के लोग रहते है। ऐसे में सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकार्ड की त्रुटि को ठीक किया जाना अति जरूरी है। प्रदेश सरकार सहित गद्दी से संबंधित नेताओं से भी मुलाकात की जा चुकी है।
सभी ने मांग को पूरा किए जाने की बात रखी कि त्रुटि को दुरुस्त किए जाना चाहिए। विपक्ष में बैठे नेता भी इस संबंध में गद्दी शब्द जोड़ने की बात कह रहे है, तो सीएम क्यों अपने ही लोगों को दरकिनार कर रहें है। सीएम से आठ बार मुलाकात की है। अगर दिए गए समय में मांगें नहीं मानी जाती हैं तो उपजातियां आगामी उपचुनावों में अपना रुख बदल लेंगी।
