जेएनएन, धर्मशाला। देश विदेश में ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध बांसुरी वादक डा. राजेंद्र गुरंग की मधुर बांसुरी की धुनें अब नहीं सुनाई देंगी। उनका रव‍िवार देर सायं न‍िधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनका इलाज डीएमसी लुधियाना में चल रहा था। 64 वर्ष के गाेरखा समुदाय से संबंधित डा. राजेंद्र गुरंग का जीवन सदैव संगीत के लिए समर्पित रहा।

कई पाठशालाओं, संगीत संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के उपरांत वह राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला से वर्ष 2012 में सेवानिवृत हुए थे। मृदुभाषी एंव विनम्र व्यक्तित्व के धनी डा. गुरंग का सम्पूर्ण जीवन संगीत से सरोबार था। विशेष रूप से बांसुरी में ख्याति प्राप्त राजेंद्र गुरंग सितार, हारमोनियम , तबला वादक के साथ एक अच्छे गायक भी थे। वह विश्व विख्यात बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरिसिया के शिष्य थे। डा. गुरंग शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ हिमाचली व गारेखाली संगीत व संस्कृति के भी मर्मज्ञ थे।

 

Posted By: Munish Dixit