शिमला, जेएनएन। पूर्व मुख्यमंत्री व अर्की के विधायक वीरभद्र सिंह वीरवार को विधानसभा के बजट सत्र में भाग लेने पहुंचे। इससे पहले वह सदन के बाहर धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री व चार अन्य विधायकों को समर्थन में धरने पर बैठ गए। वीरभद्र के आने के बाद कांग्रेस सदन में आक्रामक रुख अपना सकती है। वीरभद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि सदन में जो गतिरोध चल रहा है वह समाप्त होना चाहिए। वीरभद्र सिंह के लिए धरना स्‍थल पर कुर्सी लगाई गई है। वीरभद्र सिंह के समर्थन के बाद कांग्रेस सदन में भी मजबूत दिख सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस का प्रदर्शन गलत नहीं था। विपक्ष का काम सदन और सदन के बाहर अपना विरोध जताना है। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल कि गतिरोध को तोड़ने के लिए वह मुख्यमंत्री से मिलने जाएंगे या मुख्यमंत्री को उनके पास आना चाहिए। वीरभद्र सिंह ने कहा कि वे एक बार के मुख्यमंत्री हैं और मैं छह बार मुख्यमंत्री रह चुका हूं। गतिरोध को समाप्त करने के लिए सत्ता पक्ष को विपक्ष के पास आने की आवश्यकता है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि इस तरह का कदम उठाया गया हो और इस तरह की नौबत आई हो। मैं होता तो एक घंटे में इस सारी समस्या का हल निकाल देता। वीरभद्र सिंह विधानसभा परिसर के बाहर धरना स्‍थल से वापस लौट गए, वह सदन की कार्यवाही में भाग लेने नहीं गए।

निलंबित विधायकों के समर्थन में धरने पर बैठे थे राठौर

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर भी बुधवार निलंबित नेता प्रतिपक्ष सहित पांच विधायकों के समर्थन में विधानसभा के बाहर धरने पर बैठे थे। उन्होंने निलंबन को सरकार की एकतरफा कार्रवाई बताते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने सरकार से निलंबन को तुरंत रद करने की मांग की अन्यथा कांग्रेस इसके विरोध में सड़क पर उतरेगी। अगर प्रदेश में व्यवस्था बिगड़ी तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस अवसर पर जिला शिमला शहरी अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, ग्रामीण अध्यक्ष यशवंत सिंह छाजटा, कांग्रेस सचिव यशपाल तनाइक, सुशांत कपरेट, ब्लॉक अध्यक्ष ग्रामीण गोपाल शर्मा, कसुम्पटी ब्लॉक अध्यक्ष रामकृष्ण शांडिल, नरेंद्र ठाकुर, राजेश वर्मा उपस्थित थे।

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