शिमला, अनिल ठाकुर। Mid Day Meal In Schools, हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों को मिड-डे मील (एमडीएम) के तहत ब्रेकफास्ट नहीं मिलेगा। केंद्र सरकार ने एमडीएम के तहत बजट देने से इन्‍कार कर दिया है। शिक्षा विभाग ने मिड-डे मील का पैटर्न बदल कर दोपहर के भोजन के साथ बच्चों को ब्रेकफास्ट करवाने की योजना तैयार की थी। इसका प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया था। केंद्र से इसके लिए अतिरिक्त बजट की मांग की थी। एमडीएम को लेकर केंद्रिय शिक्षा मंत्रालय में आयोजित प्रोजेक्ट अप्रूव बोर्ड (पीएबी) की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई थी। बैठक में कहा गया कि अभी केंद्रिय कैबिनेट की मंजूरी इसको लेकर अभी नहीं आई है।

ऐसे में राज्य सरकारों को इसके लिए बजट जारी नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार यदि चाहे तो अपने स्तर पर इसके लिए प्रयास कर सकती है। हिमाचल की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि वह मिड डे मील में ब्रेकफास्ट को भी शामिल कर सके। केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में पत्र राज्य सरकार को जारी किया गया है।

यह था प्रस्ताव में

शिक्षा विभाग ने ब्रेकफास्ट के लिए जो प्रस्ताव तैयार किया था, उसके तहत रोजाना बदल-बदल कर खाना देने की योजना थी। इसमें दलिया, खिचड़ी के अलावा सप्ताह में एक या दो दिन दूध देने का भी प्रविधान किया गया था। इसके अलावा ताजी सब्जियां, फल को भी डाइट प्लान में शामिल किया गया था। राज्य स्तर पर आयोजित गवर्निंग काउंसिल ने इसे मंजूर कर केंद्र को भेजने के लिए कहा था।

अभी तक पहली से आठवीं कक्षा तक के लिए है व्यवस्था

अभी तक मिड-डे मील केवल कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को दिया जाता है। अब इसे प्री प्राइमरी के लिए भी शुरू किया जा रहा है। कोविड के कारण पिछले डेढ़ साल से छोटी कक्षाओं के बच्चे घरों में ही हैं। ऐसे में प्री प्राइमरी को अभी तक मिड-डे मील नहीं दिया जा रहा है। मिड-डे मील के तहत पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों को 100 ग्राम चावल और छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 150 ग्राम चावल प्रतिदिन मिलते हैं। सब्जी 60 ग्राम, दाल 30 ग्राम, घी पांच ग्राम, नमक तीन ग्राम, मसाला दो ग्राम, प्याज 10 ग्राम, ड्राई फ्रूट छह ग्राम प्रति विद्यार्थी दिए जाते हैं।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma