मंडी, जागरण संवाददाता। हिमाचल में स्वास्थ्य विभाग में किस कंपनी की दवा सप्लाई होगी... किस फर्म को कितना ऑर्डर मिलेगा... यह सब तय करता था एक बड़े नेता का कर्ताधर्ता। निलंबित स्वास्थ्य निदेशक की तरह इस कर्ताधर्ता पर भी नेता का पूरा आशीर्वाद था। इसी कृपा का फल था कि वह चंडीगढ़ में बड़ी दवा कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दवा व उपकरण सप्लाई की डील तय करता था। इतना ही नहीं बीबीएन की दवा कंपनियों के साथ हिसाब-किताब का काम भी इसी के जिम्मे था।

आपूर्ति का सौदा तय होने के बाद कमीशन तय होती थी। कितनी कमीशन किस अधिकारी को दी जाएगी। यह भी चंडीगढ़ में ही तय हो जाता था। कमीशन का पैसा पहुंचाने का काम भी कर्ताधर्ता देखता था। इसकी गिनती नेता के साथ सिपहसलारों में होती है, चर्चा है कि कारोबार ही एक प्रकार से यह देखता है।

निलंबित स्वास्थ्य निदेशक की फोन कॉल रिकॉर्ड कर ऑडियो वायरल करने वाला आरोपित सिरमौर जिले का रहने वाला है। राजनीतिक महत्वाकांक्षा इतनी थी कि दो बार बीएसपी के टिकट से भाग्य भी अजमा चुका है। वह नेताजी से पहले एक पूर्व विधायक का पीए भी रह चुका है। दवा सेक्टर के रियल एस्टेट का कारोबार भी आरोपित संभालता है। कहां कौन सा प्रोजेक्ट कब लगेगा, किसके पास कितनी जमीन है। यह जानकारी जुटाना इस का काम था। दवा कंपनियों के मालिकों को नेता व निलंबित स्वास्थ्य निदेशक से मिलवाने का काम भी आरोपित ही करता था।

जिलों में भी सक्रिय हुई विजिलेंस

स्वास्थ्य निदेशक के जाल में फंसने के बाद अब विजिलेंस प्रदेश के अन्य जिलों में भी सक्रिय हो गई है। अब ऐसे लोगों की जन्मपत्री तैयार की जा रही है जो नए डीलर बने हैं। दवा व उपकरणों की सप्लाई के नाम पर जिन्होंने जमकर हाथ रंगे हैं। इस फेहरिस्त में उन लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने उपकरणों के नाम पर स्वास्थ्य संस्थानों को घटिया सामान सप्लाई कर चांदी कूटी है।

 

Posted By: Rajesh Sharma

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