प्रवीण कुमार शर्मा, ज्वालामुखी

धरोहर गांव गरली में सौ वर्ष पुराना सिविल अस्पताल दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। गरली में 1921 में समाजसेविका बुधां देवी के नाम पर महिला अस्पताल बनाया गया था। बुधां देवी गरली के समाजसेवक राय बहादुर मोहन लाल सूद की माता थी। माता के नाम पर ही उन्होंने महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की खातिर अस्पताल का निर्माण करवाया था लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी अस्पताल का जीर्णोद्धार नहीं हो सका है। स्वीकृत 30 बिस्तर वाले अस्पताल में मात्र आठ बिस्तर से ही काम चलाया जा रहा है।

अस्पताल में डाक्टरों के चार पद स्वीकृत हैं, जबकि दो ही चिकित्सक ही सेवाएं दे रहे हैं। दंत चिकित्सक का स्वीकृत पद भी रिक्त है। स्टाफ नर्स के चार पद स्वीकृत हैं पर दो ही सेवाएं दे रही हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पांच पद स्वीकृत होने के बावजूद तीन रिक्त हैं। लिपिक का एक पद सृजित है जोकि खाली है। जबकि आपरेशन थियेटर सहायक का स्वीकृत एक पद रिक्त है।

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अस्पताल में पहली डाक्टर ब्रिटिश थीं। ब्रिटिश डा. गीडियन महिला रोग विशेषज्ञ थीं। महिलाओं के लिए अस्पताल प्रसिद्ध था। इस कारण जनाना अस्पताल के नाम से उस समय इसका नामकरण भी हुआ।

-ललित शर्मा, समाजसेवी।

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उचित सुविधाएं न मिलने के कारण देहरा, कांगड़ा या टांडा का रूख करना पड़ता है। जल्द अस्प्ताल की दशा सुधरने के लिए कदम नहीं उठाया गया तो जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

-सुशांत मोद्रगिल, उपप्रधान, गरली पंचायत।

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अस्पताल में बिस्तरों की संख्या के साथ चिकित्सकों की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि लोगों को आपात स्थिति में दूरदराज न जाना पड़े। इस विषय पर सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।

-हंसराज धीमान, पूर्व मंडल अध्यक्ष भाजपा जसवां-परागपुर

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लंबे संघर्ष के बाद रक्कड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सुविधाओं का आश्वासन मिला है। गरली का 100 साल पुराना अस्पताल नेताओं की बेरुखी के कारण जस का तस है। अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।

-अनुज शर्मा, ब्लाक समिति सदस्य, भड़ोली जदीद।

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सिविल अस्पताल गरली में पूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं सहित नए भवन व अन्य जरूरतों को उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर के सामने रखा है। आपातकाल में मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए हाल ही में सरकार ने एंबुलेंस दे दी है।

-स्नेह लता परमार, जिला परिषद उपाध्यक्ष कांगड़ा

Edited By: Jagran