धर्मशाला, जेएनएन। जिला कांगड़ा के कृषि बिभाग की राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर के अधिकारियों व विकास खंड परागपुर की संयुक्त टीम ने 23-06-2021 को कीट ग्रसित मक्की के खेतों का नीरीक्षण किया। पिछले वर्ष इस कीट का प्रकोप इस विकास खंड के विभिन्न क्षेत्रों में जुलाई के महीने में पाया गया था तथा किसानों को इस कीट की सुंडी की पहचान व इसके नुकसान के बचाव के लिए अनुमोदित जैविक व रासायनिक दवाइयों की भी जानकारी दी गई थी।

किसान भाइयों ने समय रहते इस कीट पर नियंत्रण पा लिया था। लेकिन इस वर्ष, यह कीट एक महीना पहले ही मक्की की फसल पर आ गया है और अभी मक्की के पाैधे भी 5-7 पते की अवस्था में हैं। इस अवस्था में यह कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। इस टीम ने परागपुर ब्लाक के सेहरी, पट उमरा, गडोट, बणी, गढ़, धाझग व आसपास के खेतों का निरिक्षण किया व पाया कि इस कीट का नाम फॉलआर्मी वर्म है तथा इस कीट का प्रकोप मक्की की फसल पर है। इस टीम ने लोगों को इस कीट की रोकथाम की जानकारी दी।

कृषि उपनिदेशक डा. जीत सिंह ने यह दी किसानों को सलाह

जिला कांगड़ा के कृषि उप निदेशक डॉ जीत सिंह ने जिला कांगड़ा के सभी किसानों को सलाह दी है कि इस कीट की रोकथाम के लिए किसान भाई अपने खेतों में कीट का प्रकोप शुरू होते ही 5 प्रतिशत एनएसके इo (नीम) या अज़दिराक्टिन (नीम) 1500 पीपीएम का 5 मिo लीo दबाई प्रति लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त प्रकोप अधिक होने पर रासायनिक दबाईयों जैसेकि क्लोरेंटीनिलिप्रोल 18.5 फिसद एससी का 0.4 मिली दबाई को एक लीटर पानी में मिलाकर (8 मिo लीo को 20 लीटर पानी प्रति कनाल) या थायोमिथोजेम 12.6 प्रतिशत लेम्डासाईंहेलोथिन 9.5फीसद 0.25 मिo लीo प्रति लीटर पानी (5 मिo लीo को 20 लीटर पानी प्रति कनाल) या स्पाईनेटोरम 11.7 फिसद एसo सीo का 0.5 मिo लीo प्रति लीटर पानी (5 मिo लीo को 20 लीटर पानी प्रति कनाल) या एमामेक्टिन बेंजोएट 5 फिसद एस जी का 0.4 मिo ग्राम दबाई को एक लीटर पानी में मिलाकर (8 ग्राम को 20 लीटर पानी प्रति कनाल) छिड़काव करें। यह दवाइयां कृषि विभाग से लाइसेंस प्राप्त दवाइयों की दुकानों में उपलब्ध हैं। अधिक जानकारी के लिए नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

Edited By: Richa Rana