पालमपुर, जेएनएन। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लए आवाज बुलंद की है। कर्मचारियों ने सरकार से पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर नई पेंशन स्कीम को बंद करने की मांग की है। न्यू पेंशन कर्मचारी संघ पंचरुखी की बैठक में विभिन्न विभागों के करीब 40 कर्मचारियों ने भाग लिया। संघ के प्रधान दीपक शर्मा ने बताया कि हिमाचल सरकार से मांग है कि जल्दी केंद्र सरकार की 2009 की अधिसूचना को प्रदेश में भी लागू कर दिया जाए।

नोटिफिकेशन में यह प्रावधान है कि अगर नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या दिव्यांग हो जाता है तो उसके परिवार को पुरानी पेंशन योजना के तहत मिलने वाले लाभ प्रदान किए जाते हैं। बैठक में राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय राणा, महिला ङ्क्षवग अध्यक्ष गुड्डी देवी, शांता शर्मा, सचिव सनी कुमार, कोषाध्यक्ष राजेश लोहिया, विनोद, रणधीर, अनिल कुमार, बृजमोहन, गुरुदयाल, अंजना, श्रेष्ठा मौजूद रहे।

वहीं नई पेंशन स्कीम कर्मचारी एसोसिएशन के जिला प्रधान राजिंद्र मन्हास ने बताया कि आज कर्मचारी को एनपीएस के पैसे के लिए भी दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरकारी सेवा में नियमित होने के बाद एनपीएस कर्मचारी को एनपीएस में पैसा जमा करने के लिए परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर किट के लिए अप्लाई करना होता है। उस फॉर्म में सभी जरूरी कागजात जैसे कि बैंक डिटेल आदि भरी जाती है।

एनपीएस कर्मचारी इस पैसे को तीन साल बाद सेङ्क्षवग में से 25 फीसद राशि निकाल सकता है। जिसमें पिछले कुछ महीनों से इस प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। यहां से ही कर्मचारियों की परेशानियों का सबब शुरु होता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस व्यवस्था को बंद कर पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए।

सभी कर्मचारियों के लिए भी बने स्थानांतरण नीति

जिला विज्ञान अध्यापक संघ ने शिक्षकों के लिए प्रस्तावित स्थानांतरण नीति को सभी पर लागू करने की मांग की है। प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ जिला अध्यक्ष भीम सिंह ठाकुर, महासचिव भूप ङ्क्षसह सैणी, खंड जोगिन्द्रनगर अध्यक्ष सतपाल वरवाल, जिला वित्त सचिव मनोज कटोच, खंड पद्धर अध्यक्ष धीरज शर्मा, खंड गोपालपूर प्रधान शशि शर्मा, खंड सुन्दरनगर प्रधान रविकांत व खंड चच्योट प्रधान प्रवीण पराशर ने बताया कि वर्तमान प्रस्तावित स्थानांतरण नीति के अनुसार समूचे प्रदेश को पांच जोन में बांटा गया है, जो तर्क संगत नहीं है। संघ ने चेताया कि यदि फिर भी शिक्षा विभाग ने वर्तमान प्रस्तावित स्थानांतरन नीति को लागू किया तो संगठन प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा।

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