जागरण संवाददाता, धर्मशाला : केंद्रीय विश्वविद्यालय के धौलाधार परिसर धर्मशाला में संस्कृत भारती कांगड़ा ने रविवार को जिला सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने बतौर मुख्य अतथि शिरकत की। मुख्य अतिथि ने कहा कि संस्कृत भाषा सभी भारतीय भाषाओं की जननी होने के कारण देशवासियों को एकजुट करने में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

भारत का प्राचीन चिंतन, विचार एवं जीवन संस्कृत के माध्यम से ही विकसित हुआ है। प्रदेश में संस्कृत को दूसरी भाषा का दर्जा दिलवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे, ताकि संस्कृत और संस्कृति के उत्थान का मार्ग प्रशस्त हो सके। दर्शन, साहित्य, विज्ञान, ज्योतिष, वास्तुकला, आयुर्वेद, योग, गणित व संगीत के प्रत्येक क्षेत्र के ज्ञान कोष की कुंजी संस्कृत है। इन विषयों के विशेषज्ञ संस्कृत भाषा से संपन्न होकर समर्थ हो सकेंगे। वैदिक काल से लेकर वर्तमान तक भारतीय संस्कृत भाषा निरंतर प्रवाहमान है। वर्तमान समय में भी हजारों लोगों की व्यवहार भाषा संस्कृत है। उन्होंने आयोजकों को 20 हजार रुपये देने की घोषणा की। इस दौरान विज्ञान एवं वस्तु प्रदर्शन का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर एसडीएम धर्मशाला धर्मेश रमोत्रा, तहसीलदार संजीव नेगी, अध्यक्ष भूषण रैणा, मुख्यवक्ता जय प्रकाश ¨सह, विशिष्ट अतिथि सुनील मनोचा व अन्य उपस्थित रहे।