धर्मशाला, जेएनएन। 1905 के महाविनाशकारी भूकंप के बाद से ही हिमालयन रेंज में बार-बार झटके क्यों लगते हैं और क्यों इनका मुख्य केंद्र कांगड़ा, चंबा व मंडी रहता है। भूकंप से बचाव के लिए क्या तैयारियां करनी चाहिए, इन सभी बातों को लेकर देशभर में भूगर्भ वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता तीन व चार अप्रैल को धर्मशाला में एकत्रित होंगे और हिमालयन रेंज भूकंप को लेकर किए गए शोध की व्याख्यान करेंगे। केंद्रीय विश्वविद्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन के संयुक्त तत्वाधान से सीयू के धौलाधार परिसर में तीन व चार अप्रैल को आपदा प्रबंधन पर कार्यशाला लगेगी।

कार्यशाला के पहले दिन अतिरिक्त सचिव राजस्व व लोक निर्माण विभाग हिमाचल प्रदेश मनीष नंदा बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगी, वहीं सीयू कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य 1905 में हुए भूकंप में हुए विनाश और मौजूदा समय के यहां की भौगोलिक स्थितियों पर मंथन करना होगा। शोधपत्र पढ़ने वाले विशेषज्ञों में प्रो. हर्ष के गुप्ता पूर्व निदेशक नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद, डॉ. वीसी ठाकुर व प्रो. बीआर अरोड़ा पूर्व निदेशक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलोजी देहरादून, डॉ. सुरजीत दास गुप्ता व डॉ. प्रभास पांडे जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, डॉ. पेरुमल व डॉ. नरेश वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून व डॉ. अवरीश महाजन डीन स्कूल ऑफ लाइफ साइंस सीयू सहित अन्य शामिल हैं।

यह रहेगा कार्यशाला का एजेंडा

दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से लोगों को भूकंप के प्रति जागरूक किया जाएगा, क्योंकि हिमालयन रेंज और मुख्य रूप से कांगड़ा का धर्मशाला, मैक्लोडगंज व शाहपुर क्षेत्र जोन पांच में आता है। जोन पांच को देखते हुए सीयू ने गत माह जिया व नूरपुर में भूकंप मापने के यंत्र स्थापित किए हैं।

कांगड़ा के घरों की स्थिति और भूंकप के बारे में पेश करूंगा शोध

कुछ समय से मैंने धर्मशाला, चैतडू और उपमंडल कांगड़ा के कुछ क्षेत्रों में शोध किया है। यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से कितने संवेदनशील हैं और यहां की घरों की स्थिति क्या है। जिस तरह यहां की घरों की डिजाइन हैं, ऐसी स्थिति में कोई बड़ा भूंकप आता है तो यहां कितना नुकसान हो सकता है। इन सभी तथ्यों को लेकर किए शोध को कार्यशाला का पेश किया जाएगा। इसके अलावा अन्य विशेषज्ञ हिमालयन रेंज पर किए शोध की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। -डॉ. अवरीश महाजन, भू-गर्भ वैज्ञानिक एवं कार्यशाला आयोजक।

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