शिमला, जेएनएन। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लेह सड़क मार्ग को यातायात के लिए हर मौसम में खुला रखने के लिए दारचा और पलचान पुल वरदान साबित होंगे। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ ने आज नई दिल्ली से वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से 44 स्थायी प्रमुख पुलों को राष्ट्र को समर्पित किया और नेचिपु सुरंग का शिलान्यास भी किया। उन्होंने कहा ये सभी पुल देश के सीमावर्ती क्षेत्र में बेहतर संपर्क स्थापित करने में मील पत्थर साबित होंगे। राष्ट्र को समर्पित किए 44 पुलों में दो पुल हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं। पुलों के लोकापर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने आधिकारिक निवास स्थान ओक ओवर से इस कार्यक्रम में भाग लिया। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों और जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर भी अपने राज्यों से इस आयोजन में शामिल हुए।

जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय, मुख्य अभियंता बीआरओ ब्रिगेडियर एमएस बाघी और कर्नल जेएस बरगोटी शिमला से तथा शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर, सासंद रामस्वरूप शर्मा वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

लेह पहुंचना हुआ आसान

मनाली-सरचू-लेह राजमार्ग पर स्थित दारचा बरसी पुल भागा नदी पर 360 मीटर लंबा है। यह पुल देश का दूसरा सबसे लंबा पुल है। इस पुल का निर्माण 27.25 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यातायात सुचारू बनाए रखने के साथ यह नया पुल अधिक भार वहन क्षमता में भी सहायक सिद्ध होगा। दारचा लाहुल में केलंग से 33 किलोमीटर दूरी और 11 हजार 20 फीट ऊंचाई पर स्थित है। इस परियोजना को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 70 सड़क निर्माण कंपनी द्वारा निर्मित किया गया है।

ब्यास पर छोटा पुल मगर अहम

मनाली-सोलंग-लेह राजमार्ग पर ब्यास नदी पर बनाए गए 110 मीटर लंबे पलचान पुल लोकार्पित किया गया। इस पुल का निर्माण 12.83 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।

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