कांगड़ा, रितेश ग्रोवर। कोरोना वायरस ने जहां पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, वहीं इस वायरस से लड़ने के लिए टांडा में गठित टीम अपने कर्तव्य का पालन करने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है। इस महामारी में हर समय संक्रमित होने का डर बना रहता है लेकिन फिर भी डॉक्टर, स्टाफ नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मी डटे हैं। टांडा मेडिकल कॉलेज पहले पॉजिटिव मरीज को ठीक करने में सफल रहा है, जिससे टीम के हौसले बुलंद हैं। टांडा में पहले दो मरीजों का इलाज करने वाली स्टाफ नर्स की टीम से दैनिक जागरण ने बातचीत की। स्टाफ नर्स की टीम इन दिनों क्वारंटाइन में है, जिसे 14 दिनों तक एक निजी होटल में ठहराया गया है। इसके बाद फिर से यह टीम अपने काम में जुट जाएगी।

स्टाफ नर्स की टीम में मेटरंस निर्मल, ऊषा, अभिलाषा, वार्ड सिस्टर बृजला, नर्सिग अधिकारी पूनम व स्टाफ नर्स में जया सैनी, दीपिका गिल, नेहा शर्मा, मनीता, अविनाश, मंजिता, मंजीत कौर, मधु, बिंदू, गुडी, मोनिका व ममता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि टांडा में कोरोना वायरस को लेकर विशेष वार्ड की स्थापना फरवरी के पहले सप्ताह कर दी थी। उस समय डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, स्टाफ नर्स की टीम गठित कर दी थी। टांडा में पीड़ित मरीज का इलाज करने के लिए एक माह से स्टाफ नर्स को ट्रेनिंग दी जा रही थी। किसी भी नर्स को कोरोना पीड़ित मरीज को लेकर अनुभव नहीं था। सीनियर डॉक्टर, सीनियर स्टाफ नर्स ने टीम को पूरा सहयोग किया। ट्रेनिंग उपचार में काफी मददगार साबित हुई।

20 मार्च को स्टाफ टीम को बताया गया कि प्रदेश के पहले दो पॉजिटिव मरीज टांडा लाए जा रहे हैं, जिसके लिए वे तैयार रहें। सभी के अंदर डर जरूर हुआ परंतु मरीजों के आने पर स्टाफ नर्स की टीम पूरी तरह तैयार थी और अपने काम में जुट गई। उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए सरकार व मेडिकल प्रशासन ने संपूर्ण संसाधन उपलब्ध कराए थे। शुरू में दिक्कत जरूर हुई लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया मरीज की हालत में सुधार आना शुरू हो गया जिससे सभी सदस्यों के हौसला बढ़ा।

स्वजनों ने किया सहयोग

स्टाफ नर्स की सदस्यों ने बताया कि इस लड़ाई में उन्हें अभिभावकों ने काफी हौसला दिया और उन्हें बताया कि वे बेखौफ होकर अपने कर्तव्य का पालन करें।

पीड़ित महिला ने शुरू में किया परेशान

कोरोना वायरस पीड़ित महिला को जब टांडा लाया गया तो उसके इलाज की जिम्मेदारी भी इसी टीम पर थी। शुरुआती तीन दिनों में महिला ने स्टाफ नर्स की सदस्यों को काफी परेशान किया जिससे कई बार तो उनके सदस्य संक्रमित होने से बचे। सीनियर डॉक्टर व सीनियर स्टाफ नर्स के समझाने पर उसके व्यवहार में बदलाव आया और फिर वह धीरे-धीरे स्टाफ नर्स की बात मानने लगी और उसकी हालत भी अब सामान्य होने लगी।

Posted By: Rajesh Sharma

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