मंडी, जेएनएन। कोरोना संक्रमित है तो क्या हुआ, पहाड़ की बिटिया का हौसला भी पहाड़ जैसा ही है। वह संकट की घड़ी में भी अपने दायित्व से नहीं भागी बल्कि अपने साथ-साथ औरों की भी देखभाल कर रही है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के गोहर उपमंडल की युवती पंजाब के होशियारपुर के एक संस्थान से बीएससी नर्सिंग कर रही है। अंतिम वर्ष की छात्रा है। कुछ दिन पहले स्वजनों के साथ घर लौटी थी।

तीन दिन पहले कोरोना संक्रमित पाई गई थी। वह लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक के कोविड अस्पताल में भर्ती है। इसी अस्पताल में चार अन्य कोरोना संक्रमित मरीज भी हैं। इन चार मरीजों में नगर परिषद नेरचौक की रत्ती वार्ड की एक वृद्ध महिला भी शामिल है।

महिला किडनी रोग से पीडि़त है। पहले उसका कई बार डायलिसिस हो चुका है। महिला की हालत को देखते हुए मॉनिटर लगाया गया है। मरीज के रक्तचाप, नब्ज, हृदय गति व रक्त ऑक्सीजन का स्तर स्वचालित तरीके से मॉनिटर की स्क्रीन पर डिस्प्ले होता रहता है। आमतौर पर ऐसे मरीजों के साथ एक तीमारदार रहता है या फिर नर्स तैनात रहती है। मामला कोरोना से जुड़ा हुआ है। तीमारदार को साथ में रहने की अनुमति नहीं है। कॉलेज प्रबंधन ने तीन शिफ्टों में नर्सों को इस कार्य के लिए तैनात किया था।

बिटिया ने पहल करते हुए मॉनिटर पर नजर रखने का जिम्मा खुद उठा लिया। तीन दिन से अब मॉनिटर के अलावा वह वृद्धा की देखभाल भी कर रही है। इसी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों का हौसला बढ़ा रही हैं। मॉनिटर की रीङ्क्षडग में उतार चढ़ाव की जानकारी चिकित्सकों को दे रही है। बिटिया की हिम्मत देखकर वृद्धा का हौसला भी बढ़ा है। अपना सुख-दुख एक-दूसरे से साझा कर कोरोना विपदा से पार पाने के प्रयास हो रहे हैं।

मानव सेवा से बढ़कर और कोई धर्म नहीं है। प्रशिक्षण के दौरान हमें यही पाठ पढ़ाया जाता है। भले ही खुद संक्रमित हूं। अस्पताल में भर्ती वृद्ध महिला की हालत मुझसे देखी नहीं गई और उनका सहारा बनने का फैसला लिया। इससे मन को सुकून मिल रहा है। -कोरोना संक्रमित युवती।

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