मंडी, मुकेश मेहरा। पहाड़ पर रहने वाले पहाड़ सा हौसला लेकर जीते हैं। इसकी मिसाल है हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के पंडोह के नैहणी गांव की रीना ठाकुर। रीना नर्स है। 16 अप्रैल को शादी तय थी। उसने शादी को नहीं फर्ज को प्राथमिकता दी। रीना मरीजों की सेवा में खुश है। रीना का कहना है कि अगर हम पीछे हट गए तो समाज कैसे स्वस्थ होगा। वह दो साल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में कार्यरत है।

रीना की मां रेशमा ठाकुर बताती हैं बेटी की ड्यूटी जब आइसीयू में कोरोना मरीजों के साथ लगने की जानकारी मिली तो वे डर गए, लेकिन उसकी बातों से हमें हौसला मिला। 16 अप्रैल को उसकी शादी थी, मौजूदा हालात को देख दोनों पक्ष के लोगों ने शादी स्थगित करने का निर्णय लिया।

रीना 11 फरवरी को घर आई थी और 16 फरवरी को लौट गई। घर में शादी की तैयारियां चली थी। रीना ने चार अप्रैल को घर आना था। मार्च में कफ्र्यू लग गया। हमने उसे वापस आने को कहा, लेकिन उसने हमें जवाब दिया इस वक्त शादी से ज्यादा लोगों को मेरी जरूरत है। हालात सामान्य होने पर तो घर ही आना ही है।

वह आठ से 10 घंटे अस्पताल में ड्यूटी दे रही है। कोरोना मरीजों के लिए बेशक हमारी बेटी लड़ रही है लेकिन एक डर भी हमारे दिल में है, लेकिन उसका जज्बा हमारी ताकत है। रीना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पंडोह से की। नर्सिंग की पढ़ाई हरियाणा के सिरसा से की।

बकौल रीना ठाकुर आपदा की घड़ी में अगर डर गए तो खुद की नजरों में ही गिर जाएंगे। आज समाज को हमारी जरूरत है। अस्पताल में सीनियर्स के पूरे सहयोग के साथ काम हो रहा है। बस यही उम्मीद है जल्द से जल्द इस स्थिति से देश बाहर आए। रीना के पिता परम देव ठाकुर भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में नौकरी करते हैं। रीना का भाई हितेश ठाकुर दिल्ली में ही नौकरी करता है।

गाजियाबाद में तय हुआ रिश्ता

रीना का रिश्ता गाजियाबाद में तय हुआ है। उनके होने वाले पति सुरजीत कुमार इंजीनियर है। वह भी रीना का हौसला बढ़ा रहे हैं।

 

Posted By: Rajesh Sharma

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