धर्मशाला, दिनेश कटोच। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपचुनाव में प्रचार की रफ्तार भी गति पकडऩे लगी है। कांग्रेस में नामांकन के दौरान से पार्टी के चुनावी रथ को संभाले मुकेश अग्निहोत्री के बाद अब पार्टी प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने इसे रफ्तार दे दी है। उपचुनाव के लिए विधानसभा क्षेत्र धर्मशाला के सभी बूथों पर कांगेस के वर्तमान व पूर्व विधायकों की तैनाती के बाद कुलदीप राठौर ने नगर निगम के पार्षदों के साथ भी बैठक कर अपने चुनावी अभियान को गति दी है। नगर निगम के कुल 17 में से कांग्रेस समर्थित 14 पार्षदों के साथ बैठक में चुनावी चर्चा की गई। साथ ही उन्हें अपने-अपने वार्डों से भी कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के लिए जुट जाने के निर्देश दिए गए।

कांग्रेस ने नगर निगम के पार्षदों को भी इसलिए अपने साथ जोड़ा है ताकि उनके समर्थकों के वोट भी कांग्रेस के खाते में जाएं। हालांकि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्थिति नगर निगम में पार्षदों की यही थी, लेकिन इसका कोई बड़ा फायदा कांग्रेस को नहीं मिल सका था। लेकिन अब उपचुनाव में कांग्रेस जीत का कोई भी मौका नहीं खोना चाहती है।

दूसरी ओर मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा सरकार के तीन मंत्री व योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पर चार जोन में धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र को बांटकर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जो केंद्र की मोदी व प्रदेश की भाजपा सरकार की कल्याणकारी नीतियों को भुना रहे हैं। खैर अभी तक तो मंत्रियों पर ही यह जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ ही दिन में सरकार के मुखिया जयराम ठाकुर भी यहां चुनाव की कमान संभालेंगे। भाजपा के वह स्टार प्रचारक भी होंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए चुनावी दौरा भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री नौ या 10 अक्टूबर को धर्मशाला विधानसभा के प्रवास पर होंगे और यहां चुनावी जनसभाएं कर चुनावी माहौल को ओर तेज करेंगे।

पार्षदों की सलाह पर होगा वार्डों में प्रचार

2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान हुई गलती को सुधारते हुए कांग्रेस ने उपचुनाव में पार्षदों को तरजीह दी है। पूर्व चुनाव में पार्षदों को कोई खास जिम्मेदारी नहीं दी गई थी, जिस कारण हलके के शहरी क्षेत्र में भी कांग्रेस को खासा नुकसान हुआ था। हालांकि पार्टी ने वीरवार को हर वार्ड में अपने विधायकों व पूर्व विधायकों को जिम्मेवारी दी है, लेकिन शुक्रवार को हुई पार्षदों की बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि नेताओं को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कोई भी प्रचार अभियान एवं बैठक करने से पूर्व पार्षद की सहमति लेनी होगी।

Posted By: Rajesh Sharma

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