संवाद सहयोगी, धर्मशाला : जिला बाल संरक्षण इकाई कागड़ा ने पंचरुखी ब्लॉक की पंचायत मझैरना में रविवार को जागरूकता शिविर आयोजित किया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी केएस धीमान ने बताया कि आज वास्तव में ही हम बच्चे को कहीं न कहीं अकेला छोड़ने में आगे हो गए हैं। हम बिना किसी पूर्व योजना के बच्चे पैदा करते हैं और फिर उनके भविष्य की योजना भी हमारे पास कोई नही होती। उन्होंने कहा कि 67 फीसद बच्चे देश में बिना योजना के ही पैदा होते हैं और उनके भविष्य की भी कोई योजना नहीं होती है। करीब 88 फीसद बच्चों का शोषण उनके अभिभावक घर में ही करते हैं, चाहे वह शारीरिक शोषण हो अथवा मानसिक शोषण। विश्व में 37 हजार करोड़ रुपये का व्यापार बच्चों की तस्करी का होता है, जो कि चिंतनीय है। मात्र छह वर्ष की आयु में ही बच्चे का भावनात्मक विकास होना आरंभ हो जाता है और सबसे अधिक बच्चों का भावनात्मक शोषण अभिभावक करते हैं जोकि सबसे भयंकर शोषण होता है। उन्होंने बाल न्याय अधिनियम के बारे व अन्य कानूनी जानकारी भी दी।

बाल संरक्षण इकाई से रूमा गुलेरिया ने बताया कि दिन-प्रतिदिन बच्चों के प्रति बढ़ते शारीरिक शोषण की घटनाओं को रोकने के लिए पोक्सो जैसे कड़े कानून को बनाने की आवश्यकता पड़ी है। इस मौके पर मझैरना पंचायत प्रधान, पंचायत सदस्य, स्कूल प्रबंधन समिति सदस्य, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर्स, राजेंद्र कुमार व मझैरना स्कूल के विद्यार्थी मौजूद रहे।

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