शिमला, जेएनएन। हिमाचल प्रदेश में बस सेवाओं पर संकट मंडरा गया है। आलम यह कि किराये में 25 फीसद की बढ़ोत्तरी करने के बावजूद न बसें बढ़ीं और न ही सवारियां। निजी बसों कर तादाद तो बढऩे की बजाय घट गई है। इसे सौ फीसद करने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन यह एक तिहाई से भी नीचे सरक गई हैं। अभी हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की करीब 1200 रूटों पर बसें चल रही हैं, जबकि राज्य के अंदर ही साढ़े तीन हजार रूट हैं। इनमें ऑक्यूपेंसी 35 फीसद है। सभी ग्रामीण रूटों को बहाल नहीं किया जा सका है। निजी बस ऑपरेटर घाटे का रोना रो रहे हैं।

उनका दावा है कि सवारियां पहले से और कम हो गई है। इस कारण ऐसे हालत में ज्यादा देरी तक सेवाएं नहीं दे पाएंगे। लोग भी अब बसों में सफर करने की अपेक्षा निजी वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

लोग नहीं कर ज्यादा सफर

प्रदेश में लोग ज्यादा सफर नहीं कर रहे हैं। कोरोना के डर से वही लोग सफर कर रहे हैं, जिन्हें जरूरी कार्य है। बसों में यात्रा को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।

क्‍या कहते हैं पदाधिकारी व अधिकारी

  • धार्मिक स्थल बंद है। शैक्षणिक संस्थान नहीं खुल पा रहे हैं। ऐसे में बसों में भी सवारियां नहीं बढ़ पा रही है। ये पहले से भी कम हो गई हैं। बसों की संख्या पहले से घट गई है। यही हालत रहे तो बसें सड़कों पर खड़ी करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं रहेगा। -रमेश कमल, प्रदेश महासचिव, निजी बस ऑपरेटर संघ।
  • हिमाचल पथ परिवहन निगम की करीब 1200 रूटों पर बसें चल रही हैं। इनमें ऑक्यूपेंसी 35 फीसद तक है। किराये बढऩे के बाद सभी रूट बहाल नहीं किए जा रहे हैं। -पंकज सिंघल, मंडलीय प्रबंधक, ट्रैफिक, एचआरटीसी।

कहां कितनी बसें चल रही

कांगड़ा में 380, ऊना 25, बिलासपुर 70, मंडी 150, हमीरपुर 65, कुल्लू 125, सिरमौर 70, चंबा 110, नालागढ़ 45, सोलन 65, शिमला ग्रामीण 70, शिमला शहरी 75, रामपुर में 55 बसें चल रही हैं। लेकिन इन सबके बीच यह ध्‍यान देनी बाती बात है कि पहले बसों का आंकड़ा पंद्रह सौ से ऊपर चला गया था, लेकिन अब यह ढाई सौ से तीन सौ नीचे लुढ़क गया है।

Posted By: Rajesh Sharma

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