जेएनएन, धर्मशाला। अंतरराष्ट्रीय रामसर वेटलैंड पौंग बांध में कितने परिंदें पहुंचे हैं, ये वार्षिक गणना के बाद सामने आएगा। वन्य प्राणी विभाग ने बकायदा विदेशी परिंदों की वार्षिक गणना के लिए तारीखें निर्धारित कर दी हैं। 29 से 31 जनवरी तक परिंदों की गणना होगी। गणना के लिए सोमवार को तीन से 4 पक्षी विशेषज्ञों वाली 23 टीमों का गठित कर दी हैं। वन्य प्राणी विभाग के अनुमानित ताजा आंकड़ों के मुताबिक पौंग झील में 84 प्रजातियों के करीब 85,700 प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं।

रूस, चीन, मध्य एशिया, इंडोनेशिया आदि देशों में बर्फ पडऩे से वहां विचरने वाले पक्षी अनुकूल वातावरण व पसंदीदा भोज्य सामग्री उपलब्ध होने के कारण पौंग झील किनारे पहुंचते हैं। करीब 256 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी अक्टूबर से मार्च तक अठखेलियों व करलबों से सैलानियों को रिझाना शुरू कर देते हैं।

अभी तक वन्य प्राणी विंग की ओर से की गई साप्ताहिक रूटीन गणना के दौरान 55 प्रजातियों के 80 हजार से ज्यादा परिंदें दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं जनवरी में दो बार बर्फबारी होने से इस बार पिछले वर्ष की तुलना में परिंदों की संख्या बढऩे की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं। पिछले वर्ष 1 लाख, 10 हजार विदेशी परिंदे पौंग झील पहुंचे थे।

वहीं साप्ताहिक रूटीन गणना के दौरान आठ रूटों पर गणना होती है, जबकि वार्षिक गणना के दौरान 21 रूटों पर गणना की जाएगी। इसके लिए पंजीकरण के बाद टीमों का गठन किया जाएगा। वार्षिक गणना में वाइल्ड लाइफ इंस्टीटयूट ऑफ इंडिया, बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के अलावा विभिन्न वर्ड क्लबों के प्रतिनिधि पौंग पहुंचते हैं। अभी तक पौंग झील में पहुंचे विभिन्न प्रजातियों के विदेशी परिंदों में सबसे ज्यादा संख्या बार हेडिड गीज 29 हजार, कॉमन पोचार्ड 11 हजार, जबकि नॉर्दन पिनटेल 10 हजार दर्ज किए गए हैं।

इन प्रजातियों के परिंदे पहुंचते हैं पौंग

पौंग झील पहुंचने वाले विदेशी परिंदों में बार हेडिड गीज, कॉमन पोचार्ड, नॉर्दन पिनटेल, कॉमन कूट, नॉर्दन सॉब्लर, रूढि शेलडक समेत कई प्रजातियों के परिंदें शामिल होते हैं।

ऐसे होती है गणना

पौंग झील को 23 बीट में बांटा जाएगा और प्रत्येक बीट पर एक-एक पक्षी विशेषज्ञ टीम गणना करेगी। दूरबीन व वॉकीटॉकी के साथ लेस यह टीम एक दूसरे के संपर्क में रहती है। प्रवासी पक्षी अपनी प्रजाति के झुंड में ही विचरते हैं। बार हेडेड गीज प्रजाति के पक्षी एक हजार के समूह में विचरते हैं। इसी तरह कर्मोनेंट भी एक हजार के समूह में विचरते हैं। पक्षी विशेषज्ञ पहले प्रजातियों के वर्गीकरण करते हैं और इसके बाद इनके समूहों की गिनती की जाती है। पक्षी समूह गिनती के दौरान उड़ कर दूसरी बीट में चला जाए तो इसकी निगरानी दूरबीन से रखी जाती है और बीट में तैनात टीम को वॉकीटॉकी से सूचित कर दिया जाता है। पक्षियों के वर्गीकरण से लेकर समूहों की गणना तक के लिए तीन दिन का समय लग जाता है। गणना के अंतिम दिन सभी टीमों के आंकड़ों को कंपाइल कर रिपोर्ट तैयार कर ली जाती है।

गणना की पूरी तैयारी : डीएफओ

वन्य प्राणी विंग के डीएफओ कृष्ण कुमार का कहना है वार्षिक गणना की तैयारी कर ली है। गणना के बाद ही पता चल पाएगा कि इस वर्ष विदेशी पंरिदों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है या कमी आई है।

Posted By: Rajesh Sharma

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