शिमला, रमेश सिंगटा। Bike Boat Scam Arni Unversity, साढ़े तीन हजार हजार करोड़ बाइक-बोट घोटाले के तार हिमाचल प्रदेश से भी जुड़ गए हैं। इससे कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र में स्थित निजी विश्वविद्यालय अरनी फिर से सवालों के घेरे में आ गया है। इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विश्वविद्यालय की संपत्ति अटैच की है। अब विवि प्रबंधन इन संपत्तियों पर ऋण नहीं ले पाएगा। जांच एजेंसी जल्द ही कुछ और रिकार्ड भी कब्जे में ले सकती है। इससे पहले वर्ष 2020 में दबिश देकर अहम दस्तोवज कब्जे में लिए थे। आरोप है कि घोटाले का पैसा यहां निवेश किया गया।

ईडी ने हाल ही में बाइक-बोट घोटाले में 112.36 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की। यह संपत्ति गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड और संजय भाटी से जुड़ी कंपनियों की बताई गई है। इनमें उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित मेसर्स जेनिथ टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड की सागा हैबिटेट परियोजना में फ्लैट, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित अरनी विश्वविद्यालय की जमीन व भवन, नोएडा के एमेडियस परियोजना का निर्माणाधीन टावर, साहा इंफ्राटेक प्राइवे लिमिटेड और नोबेल बिल्डटेक के व्हाइट हाउस प्रोजेक्ट की सपंत्तियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार भाटी के माध्यम से ही अरनी में निवेश किया।

अरनी विश्वविद्यालय का ट्रस्ट दिल्ली से चलता है, ट्रस्टी भी दिल्ली और अन्य राज्यों के हैं। विश्वविद्यालय हिमाचल में चला रहे हैं। विश्वविद्यालय और विवाद का आरंभ से ही चोली दामन का साथ रहा है। ईडी की कारवाई से संस्थान की साख पर सवाल उठे हैैं।

बदले कई कुलपति

अरनी विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार की नियुक्ति सवालों के घेरे में रही। यहां ढाई-तीन वर्ष के भीतर कुलपति बदले हैं। निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने भी नियुक्तियों पर आपत्ति जताई थी। आयोग ने प्रशासन को नोटिस भेज कुलपति, रजिस्ट्रार की नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों, नियुक्ति पत्रों समेत बैंक खातों का ब्योरा तलब किया था। 

यह है मामला

बाइक-बोट कंपनी द्वारा किए गए घोटाले में सबसे पहले 57 मामले नोएडा के पुलिस थानों में दर्ज किए गए थे। 14 फरवरी, 2020 को सभी मामलों की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा मेरठ सेक्टर को सौंप दी थी। जांच में सामने आया है कि गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स राज्यों में फ्रेंचाइजी बनाकर लोगों से करीब 3500 करोड़ की धोखाधड़ी की है। नोएडा स्थित बाइक-बोट टैक्सी सेवा पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान हरियाणा समेत कई राज्यों के 2.5 लाख निवेशकों से ठगी का आरोप है।

अब तक हुई कार्रवाई

फर्जी कंपनी बनाकर लोगों से धोखाधड़ी पर नोएडा पुलिस ने मुख्य आरोपित संजय भाटी और उसके अन्य साथियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की। पुलिस तीन करोड़ 74 लाख की संपत्ति को अटैच कर चुकी है। संजय भाटी, राजेश भारद्वाज, विजयपाल कसाना, हरीश कुमार, विनोद कुमार, संजय गोयल विशाल कुमार, राजेश सिंह यादव, पुष्पेंद्र सिंह, विनोद कुमार, आदेश भाटी समेत जालसाजी से जुड़े 11 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की गई। इसके बाद ईडी जांच कर रही है।

क्‍या कहते हैं चेयरमैन

अरनी विश्वविद्यालय के चेयरमैन विवेक सिंह का कहना है ईडी ने जो भी कार्रवाई की है, उसकी मेरे साथ बातचीत नहीं हुई है। अनियमितताएं पहले वाले प्रबंधन की रही होंगी। हम गंदगी साफ कर रहे हैं। अभी करीब 800 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। घोटाले के बारे में पता नहीं।

क्‍या कहते हैं रजिस्‍ट्रार

रजिस्ट्रार अरनी विवि साहिब सिंह का कहना है ईडी ने संपर्क नहीं किया, हम तो विश्वविद्यालय चला रहे हैं, यह चल रहा है।

स्‍टाफ का वेतन भी डकारा

पूर्व रजिस्ट्रार अरनी विवि संग्राम सिंह ने कहा मेरे वेतन के लाखों रुपये नहीं दिए हैं। ट्रस्ट दिल्ली का और ट्रस्टी भी वहीं के, कौन मालिक हैं, पता नहीं चलता। मैंने आयोग के पास केस किया। शिक्षकों, कर्मियों के वेतन के लाखों रुपये डकारे हैं।

क्‍या कहते हैं पूर्व कुलपति

पूर्व कुलपति ब्रिगेडियर संसार चंद वर्मा का कहना है बिना किसी प्रक्रिया के विश्वविद्यालय में प्रबंधन बदल जाता है। पहले गोपाल कांडा कुलाधिपति थे। दिसंबर 2018 में इसे संजय भाटी को बेचा गया, नियमों का पालन नहीं किया। इसलिए मैंने संस्थान छोड़ दिया था।

आयोग तक को गुमराह किया गया

निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के पूर्व सदस्‍य डाक्‍टर एसपी कत्‍याल का कहना है अरनी विवि कानून व नियमों से नहीं चलती है। आयोग तक को गुमराह किया गया। कोर्स भी बंद करवाए। प्रबंधन बिना सरकार की अनुमति के कैसे बदलता है, इसकी जांच होनी चाहिए।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma