शिमला, राज्य ब्यूरो। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हिमाचल प्रदेश स्टेट सीआइडी के बाद छह हजार करोड़ के कर-कर्ज घोटाले में संलिप्त इंडियन टेक्नोमेक कंपनी के खिलाफ अब सीबीआइ ने बड़ी कार्रवाई की की है। सीबीआइ ने दिल्ली में बुधवार को कंपनी, इसके प्रमोटरों, दो कारपोरेट गारंटर व लोक सेवकों के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप है कि कंपनी ने दिल्ली स्थित 16 राष्ट्रीयकृत बैंकों के 1528 करोड़ रुपये डकारे हैं।

सूत्रों के अनुसार अब डकारी राशि ब्याज समेत 2200 करोड़ से भी पार हो गई है। इस संबंध में सीबीआइ ने हिमाचल के सिरमौर के पांवटा साहिब व कांगड़ा में आरोपितों के ठिकानों पर दबिश भी दी है। कंपनी का निदेशक विनय कुमार कांगड़ा का रहने वाला है, जबकि पांवटा साहिब में कंपनी ने फैक्ट्री स्थापित की थी। मुख्य आरोपित दिल्ली निवासी आरके शर्मा दुबई में हैं। उसे भारत नहीं लाया जा सका है।

इनके खिलाफ हुई कार्रवाई

सीबीआइ ने दिल्ली स्थित इंडियन टेक्नोमेक कंपनी, जिसकी हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक इकाई हैं, के प्रमोटर एवं मुख्य प्रबंध निदेशक आरके शर्मा, निदेशक विनय शर्मा, कोलकाता के कारपोरेट गारंटर मैसर्स थंडर ट्रेडर्स व मैसर्स गुरुपथ मर्चेंडाइज लिमिटेड व अज्ञात लोकसेवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

यह है आरोप

कंपनी के पांवटा साहिब स्थित उद्योग में हवाई जहाज के कलपुर्जे तैयार किए जाते थे। आरोपितों ने 2008 से 2013 के दौरान बैंकों से षड्यंत्र कर खास सुविधाएं व ऋण प्राप्त किया। बैंक आफ इंडिया के नेतृत्व वाले 16 बैंकों के समूह को 1528.05 करोड़ रुपये की हानि पहुंचाई। बैंकों के समूह में बैंक आफ इंडिया, यूनियन बैंक आफ इंडिया, आन्ध्र बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, स्टेट बैंक आफ हैदराबाद, सैंट्रल बैंक आफ इंडिया, कारपोरेशन बैंक, एचडीएफसी बैंक लिमिटेड, ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स, सारस्वत कोआपरेटिव बैंक, स्टेट बैंक आफ पटियाला, यूको बैंक, इलाहाबाद बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक एवं डीबीएस शामिल हैं।

क्या है मामला

आबकारी एवं कराधान विभाग ने मार्च, 2014 में वैट जमा न करवाने पर पांवटा साहिब के जगतारपुर स्थित इंडियन टेक्नोमेक कंपनी की फैक्ट्री को सील कर दिया था। विभाग ने कंपनी पर 2009 से 2014 तक 2175 करोड़ का टैक्स चोरी करने का मामला दर्ज किया था। बाद में यह राशि सीएसटी और वैट को मिलाकर 2200 करोड़ हो गई थी। इसके अलावा बिजली के बिलों में भी फर्जीवाड़ा किया गया। इसकी सीआइडी कोर्ट में तीन अलग- अलग चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने नई दिल्ली स्थित बैंकों से कर्ज लिया था। कर्ज लेने के लिए ज्यादा उत्पादन दर्शाया गया। कंपनी ने कर्ज की कुल राशि में से 226 करोड़ रुपये लौटा दिए थे। पहली जून, 2016 तक 1590 करोड़ रुपये कंपनी नहीं चुका पाई थी। जांच में घोटाले की राशि छह हजार करोड़ रुपये से अधिक पाई गई है।

Edited By: Virender Kumar