संवाद सहयोगी, भवारना : उत्पाती बंदरों से परेशान भवारना व बड़घवार पंचायत के बाशिदों को अब जल्द ही इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जगी है। दोनों पंचायतों ने साझा प्रस्ताव डाल कर इसे डीएफओ पालमपुर को सौंपा था। विभाग ने चंबा से मंकी कैचर को बुला लिया है जो जल्द ही लोगों के सहयोग से बंदरों को पकड़ने की मुहिम चलाएगा।

लंबे समय से भवारना व आसपास के क्षेत्र में बंदरों ने आतंक मचा रखा है। ये बंदर लोगों पर हमला भी कर चुके हैं। इन दोनों पंचायतों ने बीडीसी सदस्य सोनी गुप्ता के साथ मिलकर इन बंदरों से निजात पाने का जिम्मा उठाया है। मंकी कैचर भवारना पहुंच गया है। मंकी कैचर उत्तम सिंह ने बताया कि लोगों के सहयोग से जल्द ही इन बंदरों को पकड़ लिया जाएगा। प्रदेश में चंबा से है एकमात्र मंकी कैचर

प्रदेश में बंदरों को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश व बिहार से मंकी कैचरों को बुलाया जाता था, लेकिन कोरोना काल के चलते अब यह प्रदेश में नहीं आ रहे हैं। अब चंबा जिले से एकमात्र मंकी कैचर की सेवाएं विभाग ले रहा है, जिसे विभाग प्रति बंदर 750 रुपये देता है। वैसे तो बंदरों को पकड़ कर विभाग उन्हें गोपालपुर या हमीरपुर ले जाता है वहां उनकी नसबंदी करके फिर से उसी स्थान पर छोड़ देता है जहां से उन्हें पकड़ा जाता है। भवारना व बड़घवार पंचायतों की बंदरों की समस्या मेरे ध्यानार्थ लाई गई थी। चंबा से मंकी कैचर को बुलाकर भवारना भेजा गया है। जल्द ही बंदरों को पकड़ कर लोगों की इस समस्या का हल हो जाएगा।

- नितिन पाटिल, डीएफओ, पालमपुर। पंचायत के माध्यम से इस समस्या का प्रस्ताव डाल कर बीडीसी के माध्यम से डीएफओ के ध्यानार्थ समस्या रखी गई थी। जिसके पर सकारात्मक परिणाम आए हैं।

- हैप्पी नरयाल, उपप्रधान बड़घवार।

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