शिमला, रविंद्र शर्मा। ऑटो सेक्टर में मंदी की आहट है, लेकिन बैंकिंग को त्योहारों का इंतजार है। हिमाचल में इन दिनों बैंकों में वाहन लोन के लिए काफी कम आवेदन आ रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि नवरात्र में बहार आ जाएगी। उनका मानना है कि मंदी की मार से नहीं, बल्कि बरसात की मार से इन दिनों धंधा कुछ मंदा है। प्रदेश के बैकों में वाहन ऋण में आई कमी को अधिकारी काले महीने से जोड़ रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार इस माह प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों के लोग कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं। लोग कोई भी नया वाहन भी नहीं खरीदते हैं। इस कारण राज्य के बैकों में वाहन लोन के आवेदनों में इन दिनों कम हुआ है। ऐसे बैंकों को कारोबार में उछाल आने के लिए नवरात्र के आने का इंतजार कर रहे है।

कम रहता है बैंकों का सीडीआर

प्रदेश में बैंकों की क्रेडिट डेबिट रेशो (सीडीआर) अभी तक पचास फीसद का आंकड़ा भी नहीं छू पाई है। कुछ साल के दौरान प्रदेश के बैंकों की सीडीआर 30 फीसद के आसपास थी, लेकिन वर्तमान में सीडीआर 45 फीसद के करीब है यानी प्रदेश में लोन लेने वालों की संख्या अभी कम है। प्रदेश के अधिकतर लोग लोन नहीं लेते हैं। बैंकों का कारोबार उद्योग जगत और रिटेल के कारोबार पर अधिक निर्भर करता है।

मंदी को लेकर कोई ठोस हल नहीं निकाला गया तो ऑटो सेक्टर में चल रही मंदी का असर दूसरे कारोबार पर भी नजर आएगा। इससे प्रदेश के बैंक  भी अछूते नहीं रहेंगे। प्रदेश के व्यापारियों का कारोबार कम होगा। कारोबारी बैंक को लोन वापस नहीं कर पाएंगे। ऋण के खाते नॉन परफॉर्मिंग अकाउंट (एनपीए) हो जाएंगे। -राजीव सूद, सीए शिमला।

प्रदेश के बैंकों में मंदी का कोई असर नहीं है। बरसात के दिनों यहां नए व्हीकल नहीं खरीदते हैं। दूसरा प्रदेश की स्थानीय परंपरा का असर भी रहता है। काले महीने में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इसके बाद शराद चल पड़ेंगे तो ऐसे में नवरात्र में बैंकों का कारोबार पटरी पर लौट आएगा। -जेएन कश्यप, संयोजक राज्यस्तरीय बैंक समिति।

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