पालमपुर, जेएनएन। हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने नवंबर के दूसरे पखवाड़े में किसानों को गेहूं की बुआई करने की सलाह दी है। संस्थान के प्रसार शिक्षा निदेशक वाईपी ठाकुर ने बताया कि निचले सिंचित क्षेत्रों में गेहूं की एचपीडब्ल्यू 155, वीएल 907, एचएस 507, एचएस 562, एचपीडब्ल्यू 349, एचपीडब्ल्यू 249, एचपीडब्ल्यू 360, एचपीडब्ल्यू 368, एचपीडब्ल्यू 236, व ऊंचे क्षेत्रों में सप्तधरा किस्म की बुआई करें। एक हेक्टेयर खेत की बिजाई के लिए 100 किलो ग्राम बीज डालें।

गेहूं की अगेती बिजाई में खरपतवार के पौधे में 2-3 पत्तियां आ गई हों तो उन्हें नष्ट करने के लिए वेस्टा 16 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी प्रति कनाल में घोल कर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। छिड़काव पंप से करें। छिड़काव से दो-तीन दिन पहले हल्की सिंचाई करें। प्रदेश के निचले एवं मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में प्याज की सुधरी प्रजातियों जैसे पटना रैड, नासिक रैड, पालम लोहित, पूसा रैड, एएफडीआर तथा एएफएलआर इत्यादि की पनीरी दें।

इसके अलावा इन्हीं क्षेत्रों में लहसुन की सुधरी प्रजातियों जीएचसी 1, एग्रीफाउफँड पार्वती की बिजाई पंक्तियों में 20 सेंमी व पौधे में 10 सेंमी की दूरी पर बिजाई करें। बिजाई से पहले 200-250 ङ्क्षक्वटल गोबर की गली सड़ी खाद के अतिरिक्त 235 किग्रा मिश्रण 12:32:16 खाद तथा 37 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर खेतों में डालें। निचले एवं मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मटर की सुधरी प्रजातियों जैसे पालम समूल, पंजाब 89, पालम प्रिया, आजाद पी 1, जीएस 10 एवं आजाद पी 03 की बिजाई 45 सेंमी कतारों तथा 10 सेंमी पौधे से पौधे की दूरी पर करें।

मूली, गाजर व शलजम के पौधों की करें छंटाई

इन दिनों मूली, गाजर व शलजम आदि में पौधे की छंटाई कर 7-10 सेंमी पौधे से पौधे की दूरी बनाए। फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रॉकली, चाइनीज सरसों इत्यादि की रोपाई 45-60 सेंमी पंक्ति से पंक्ति तथा 30-45 सैंमी पौधे से पौधे की दूरी पर करें। गांठगोभी, पालक, लैटयूस, मेथी, धनिया व क्यूँ, आदि को भी लगाने/बोने का उचित समय है।

Posted By: Rajesh Sharma

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