पालमपुर, शारदा आनंद गौतम। बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र से निकलकर प्रदेश महिला मोर्चा के शीर्ष पद पर पहुंची इंदु गोस्वामी का इस्तीफा अंतत: स्वीकार हो गया। शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मकसद से इंदु को पालमपुर से विधानसभा चुनाव में उतारा था। उन्होंने ज्वालामुखी या धर्मशाला के बजाय शांता कुमार के गृह क्षेत्र पालमपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे के लिए हामी भरी, जहां पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा दावेदार माने जा रहे थे। अंत समय तक वह अपने शिष्य की पैरवी करते रहे, लेकिन आलाकमान के निर्देश पर उन्हें झुकना पड़ा। हालांकि प्रवीण भी आजाद लड़े।

विधानसभा चुनाव के दौरान चर्चाओं में इंदु गोस्वामी को बड़ी कुर्सी की दावेदार भी बताया जाता था। लेकिन प्रचंड लहर के बावजूद पालमपुर में वह जीत नहीं पाईं। मंथन बैठक में उन्होंने इसका जिम्मेदार पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बताया। इससे भी दूरियां बढ़ीं। सरकार के गठन के बाद पार्टी के अन्य नेता यहां पर हावी होते चले गए। लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के बागी प्रवीण की भी घर वापसी हो गई। बताया जाता है कि उन्होंने प्रवीण की घर वापसी पर एतराज नहीं जताया था। इंदु से जुड़े लोग दावा करते हैं कि वह कभी विधायक पद के पीछे नहीं भागीं बल्कि मान सम्मान न मिलने के कारण यह फैसला लेने पर विवश हुई हैं। उनके नजदीकियों का कहना है कि उन्हें मुख्यमंत्री या स्मृति ईरानी की रैलियों का भी पता नहीं था।

इंदु के नजदीकियों का यह भी कहना है कि उनके बताए कामों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही थी जबकि दूसरे नेताओं और मंत्रियों का दखल भी बढ़ रहा था। जिस प्रकार इंदु ने त्यागपत्र दिया और वह स्वीकार भी हो गया, उससे यह तो सामने आ ही रहा है कि यह प्रकरण ताजा नहीं, इसके बीज पहले से रोपे जा चुके थे। उधर, संगठन के लोग कहते हैं कि इंदु ने पालमपुर को छोड़ ही दिया था। इसका पलटवार इंदु के लोग यह कह कर करते हैं कि वह महिला मोर्चा की जिम्मेदारी भी निभा रही थी, इसलिए केवल पालमपुर पर केंद्रित नहीं रह सकती थी।

Posted By: Rajesh Sharma

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