धर्मशाला, जागरण संवाददाता। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांगों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की चल रही क्रमिक भूख-हड़ताल वीरवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल के आश्वासन और उपायुक्त कांगड़ा के मिलने के बाद खत्‍म की गई है। इसके बावजूद एबीवीपी कार्यकर्ताओं का सीयू के रजिस्ट्रार के प्रति रवैया वैसा ही है। विद्यार्थी परिषद के प्रांत मंत्री विशाल वर्मा ने शनिवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा सीयू को लेकर स्थानीय प्रशासन, प्रदेश और केंद्र सरकार ने हमेशा से ही नकारात्मक रवैया रखा है। इसी का परिणाम है कि आज दिन तक सीयू निर्माण नहीं हो पाया।

उन्होंने कहा कि सीयू में अव्यवस्था का आलम इस तरह का है कि यहां एक क्‍लर्क को रजिस्ट्रार एवं कुलसचिव के पद पर बिठा दिया है। अब एक क्‍लर्क को जब रजिस्ट्रार की शक्तियां मिली हैं तो वह इनका दुरुपयोग कर रहे हैं।

यह छात्रहित की अनदेखी का ही नतीजा है कि विद्यार्थी परिषद को आंदोलन की राह पर चलना पड़ा। सरकार व प्रशासन के खिलाफ परीक्षा के दौर में भी छात्र आंदोलन की राह पर उतरने को मजबूर हुए। अगर व्यवस्था सही होती तो एबीवीपी को आंदोलन करने का कोई शौक नहीं है। छात्र लगातार हक के लिए लड़ रहे थे। समाज के बहुत से लोगों ने समर्थन दिया। कई लोगों ने नकारात्मक बातें भी कहीं। आंदोलन करने वाले छात्र अपने घर की लड़ाई नहीं लड़ रहे थे, बल्कि छात्र एवं प्रदेश हित के लिए लड़ रहे थे।

इसका असर यह रहा है कि सीयू परिसर में पीने की पानी के लिए वाटर कूलर लगाया गया, कैंटीन बनाई गई। परिसर में बैठने के लिए बेंच लगाए गए। शोधार्थियों को पढ़ाई एवं शोध कार्य करने के लिए अलग से केबिन बनाए गए। कंप्यूटर और कैमरों की खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा राजनीतिक दलों हर चुनाव में सीयू के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकी गई।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने मुलाकात के दौरान आश्वासन दिया है कि एक टीम आएगी और सीयू की स्थिति का आकलन करेगी। अगले तीन माह के भीतर प्रदेश सरकार से बातचीत कर जितने भी विवाद हैं, उन्हें दूर कर शिलान्यास किया जाएगा।

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