पालमपुर, मुकेश मेहरा।  जिस देशी गाय को हिमाचल के लोगों ने महत्व नहीं दिया, आज उसका दूध विदेशों व प्रदेश से बाहर 100 रुपये और घी 1200 रुपये में प्रति किलो बिक रहा है। सांसद शांता कुमार ने देशी गाय का महत्व समझा और प्रदेश में पहली बार देसी गाय का गोसदन गोकुल नाम से आरंभ किया। खास बात यह है कि पूरी दुनिया में ए-टू नामक प्रोटीन केवल भारत की देशी नस्ल की गाय में ही मिलता है और यह ए-टू प्रोटीन मनुष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।

जब गोकुल गोशाला बनाने की योजना थी तो उस वक्त सांसद शांता कुमार को इसकी जानकारी मिली। उसी के बाद इस गोकुल सदन में देशी नस्ल की गाय पालने की योजना बनी। हैरानी की बात तो यह है कि प्रदेश में कहीं भी देशी नस्ल की गाय ही नहीं मिली। इसके बाद कायाकल्प की टीम के सदस्य निदेशक आशुतोष गुलेरी, पशु चिकित्सक डॉ. मिश्रा सहित अन्य लोगों ने राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों का दौरा किया और वहां से देशी नस्ल की गायों को पालमपुर गोकुल सदन में लाया गया। गोकुल गोसदन में तीन देशी नस्लों की 10 गाय रखी गई हैं। इन गायों के दूध का प्रयोग कायाकल्प में आने वाले मरीजों के लिए किया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य लाभ लेने वाले लोगों को स्वास्थ्यवर्धक दूध उपलब्ध हो सके।

इनमें से गिर गाय राजस्थान और साहीवाल नस्ल की गाय हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भेजी हैं। देशी गाय में पाए जाने वाले ए-टू प्रोटीन पर शोध करके ब्राजील भी भारत की देशी गाय पालन को प्रोत्साहित कर रहा है। ब्राजील में इनकी नस्लों को और विकसित किया गया है। नूरपुर क्षेत्र से संबंधित युवा भी देशी गाय पालकर ही लाखों रुपये कमा रहा है। सांसद शांता कुमार ने भी सरकार व लोगों से कार्यक्रम के जरिए आग्रह किया कि सरकार देसी गाय को पालने के लिए लोगों को प्रेरित करे।