शिमला, रमेश सिंगटा। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग में कार्यरत 82 कनिष्ठ अभियंता (जेई) की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैैं। डिग्रीधारकों के हितों की अनदेखी कर डिप्लोमा धारकों की भर्ती करने के मामले में सुप्रीमकोर्ट ने फैसला सुनाया है। इसके बाद लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता (ईएनसी) डीएस दहल ने शनिवार को टॢमनेशन आर्डर जारी किए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जेई के पदों के लिए पात्र डिग्री धारकों को राहत मिली है। इस बीच विभाग ने 122 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के आदेश भी जारी कर दिए गए हैैं। पहले हाईकोर्ट से फैसला इनके पक्ष में आया और बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।

इन जूनियर इंजीनियर (कनिष्ठ अभियंता) की भर्ती हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर ने 2019 में की थी। उस समय डिग्रीधारकों को बाहर का रास्ता दिखाया गया था। उन्हेंं नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माना गया था। कर्मचारी चयन आयोग ने इन्हें अपात्र घोषित किया था। ऐसे में कनिष्ठ अभियंता के 82 पदों पर डिप्लोमा धारकों का चयन हो गया। इसके बाद डिग्रीधारकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में डिग्रीधारकों को पात्र माना। हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई है।

इस फैसले के बाद कर्मचारी चयन आयोग ने 2019 की चयन सूची को संशोधित करते हुए पहले चयनित अभ्यॢथयों को बाहर कर कुछ और पदों को जोड़ते हुए 122 पदों पर अभ्यॢथयों का चयन किया, इनमें डिग्रीधारकों को भी पात्र माना गया है।

कर्मचारी चयन आयोग ने पहली बार ऐसी व्यवस्था की थी, जिसमें डिग्री धारकों जैसे बीटेक और एमटेक को जेई के पदों पर नियुक्ति के लिए योग्य नहीं माना था। बाहर किए अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे। हाईकोर्ट से इनके पक्ष में फैसला आया। कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए विभाग ने कार्यरत 82 जेई की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया गया है। कर्मचारी चयन आयोग से संशोधित सूची के अनुसार 2019 में नियुक्त 82 जेई को टॢमनेट कर दिया गया है । अब वे सरकारी सेवा में नहीं रहेंगे। इनकी जगह अन्य का चयन होगा।

-डीएस दहल, ईएनसी, लोक निर्माण विभाग।

Edited By: Manoj Kumar