ढांगूपीर, जेएनएन। कंपकंपी व सांस रूकने के कुछ ही मिनट के बाद पशुओं की मौत हो रही है। अब तक 17 गोवंश की मौत हो चुकी है। लेकिन पशुओं की मौत अभी तक पशु चिकित्सकों केलिए भी पहेली बना हुआ है। इंदौरा विकास खंड की बलीर पंचायत के गांव चोचर के मोहल्ला मन्हासा में एक बार फिर से छह गायें मरी हैं और इससे परिवार आर्थिक समस्या बढ़ गई है और परिवार की पीड़ा व परेशानी भी बढ़ी है। गोवंश की मौत मोहल्ला व इलाका वासियों एवं पशु चिकित्सक टीम के लिए एक अनसुलझी पहेली बन कर रह गई है।

पशुओं के मरने से आर्थिकी पर पड़ा विपरीत प्रभाव

बलकार सिंह ने बताया कि अव तक कुल 17 पशु जोकि बिलकुल ठीकठाक थे देखते ही देखते कंपकंपी शुरू होती है, सांस रुकने लगता है पशु तड़पता है, बस फिर 15-20 मिनट बाद गोवंश की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार 11 जून को दो बछड़ियों जोकि लगभग दो-दो वर्ष की थी, उनकी मौत हो गई, शनिवार को एक एचएफ गाय व रविवार को सुबह एक दधारु गाय की व सांयकाल को फिर दो गोवंश की मौत हो गई जोकि एक रहस्य बन कर रह गया है।

बलकार सिंह ने बताया कि मरने वाले अधिकतर पशु दधारु थे व कुछ पशु आगामी कुछ आगामी एक माह से दूध देने वाले थे। दधारु पशुओं की मौत से उन्हें व उनके अन्य परिवार वालों को लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है, जिसकी भरपाई करना मोहल्ला वासियों के वश से बाहर है। उन्होंने प्रशासन व सरकार से विशेष सहायता की गुहार लगाई है।

प्रशासन व सरकार पीड़ित परिवार को दे राहत

बलकार सिंह ने बताया कि शनिवार नूरपूर से पशु चिकित्सा विभाग से डाक्टरों की टीम गाय की मौत की सूचना मिलने पर पूर्व की भांति चोचर गांव पंहुच कर हर तरह का मुआयना किया व मरी हुई गाय का पोस्टमार्टम किया गया। लेकिन मौत के कारणों का पता नहीं चल सका। स्थानीय लोगों ने भी प्रभावित परिवार को राहत देने की मांग प्रशासन व सरकार से की है।

Edited By: Richa Rana