राष्ट्रपति से सम्मानित हुईं हमीरपुर की मंजरी महाजन, ऑडियो बुक्स और इनोवेशन से बदली बच्चों की दुनिया
हमीरपुर की प्रधानाचार्य मंजरी वी. महाजन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया है। वह शिक्षा ...और पढ़ें

हिमाचल की महिला शिक्षक ने तैयार किया ऑडियो बुक्स, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित।
HighLights
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंजरी महाजन को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया
शिक्षा में नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर
पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा देकर महिलाओं को आजीविका प्रदान की
रणवीर ठाकुर, हमीरपुर। विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देना और विषयों को उनके लिए रुचिकर बनाना एक शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस दिशा में नवाचार के साथ काम करने वाले शिक्षक विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाते हैं।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की मंजरी वी. महाजन ने अध्यापन के क्षेत्र में इसी सोच के साथ काम किया है। शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बनाने के प्रयासों और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया।
मंजरी महाजन का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक हर विद्यार्थी की पहुंच होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से वह कनेक्ट फार एनजीओ के साथ जुड़कर ऐसे विद्यार्थियों की सहायता के लिए आडियो बुक्स तैयार करती हैं, जो किसी कारणवश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस पहल के माध्यम से अध्ययन सामग्री को विद्यार्थियों तक अधिक सहज रूप में पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
पढ़ाई के साथ वह विद्यार्थियों को जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के महत्व के प्रति भी जागरूक करती हैं, ताकि उनमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सके। मंजरी वर्ष 1998 में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में जीव विज्ञान की प्रवक्ता (लेक्चरर) नियुक्त हुई थीं।
इसके बाद उन्होंने भरवाईं, ज्वालामुखी, बालकरूपी, सुजानपुर, जंदड़ू और भलेठ के विद्यालयों में सेवाएं दीं। वर्तमान में वह पीएमश्री सीबीएसई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सुजानपुर टीहरा में प्रधानाचार्य हैं। पिछले पांच वर्ष से इस पद पर कार्यरत मंजरी शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी महत्व दे रही हैं।
मंजरी महाजन ने लड़कियों की शिक्षा के लिए भी काम किया है। वह पारंपरिक व्यंजनों के प्रचार-प्रसार की दिशा में भी सक्रिय हैं। उनकी रेसिपीज को वर्ष 2025 में सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर दो बार शीर्ष चयन में स्थान मिला। उनके शोध कार्य द जर्नल आफ आर्किड सोसाइटी आफ इंडिया में भी प्रकाशित हो चुके हैं।
शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण की पहल
मंजरी महाजन ने विद्यालयों में अध्यापन के दौरान पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया। वह प्रत्येक वर्ष पौधारोपण करती हैं और विद्यार्थियों को भी इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करती हैं। 28 वर्षों की सेवा के दौरान वह हजारों पौधे लगा चुकी हैं। इनमें अधिकांश हर्बल पौधे हैं और कई पौधे अब पेड़ बन चुके हैं। विद्यालयों के आसपास की पंचायतों में भी वह विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ मिलकर लोगों को कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक कर रही हैं।
प्लास्टिक रैपर्स से उपयोगी वस्तुएं तैयार करने की दिशा में कार्य
उनके विद्यालय परिसर में एकत्रित प्लास्टिक कचरे को पुणे स्थित एनजीओ रीचरखा को भेजा जाता है। विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र से सिंगल यूज प्लास्टिक एकत्र कर स्थानीय पंचायत में जमा कराया जाता है। प्लास्टिक रैपर्स से उपयोगी वस्तुएं तैयार करने की दिशा में भी काम किया जाता है। विद्यार्थियों और विद्यालय के स्टाफ के साथ मिलकर वह सततता और अपशिष्ट प्रबंधन पर काम कर रही हैं।
विद्यालय के प्रोजेक्ट हुए राष्ट्रीय स्तर पर चयनित
पर्यावरण और प्लास्टिक को लेकर की गई पहल के परिणाम विद्यालय के प्रोजेक्ट को मिले राष्ट्रीय स्तर के चयन में भी दिखाई दिए। सत्र 2024-25 में सततता और अपशिष्ट प्रबंधन पर तैयार विद्यालय का प्रोजेक्ट देश के पहले 70 विद्यालयों में चुना गया। सत्र 2025-26 में कचरा प्रबंधन से संबंधित प्रोजेक्ट देश के पहले 30 विद्यालयों में स्थान बनाने में सफल रहा। दोनों वर्षों में उन्हें सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पारंपरिक कला और महिलाओं की आजीविका
पर्यावरण संरक्षण के साथ मंजरी महाजन विलुप्त होती पारंपरिक हस्तशिल्प कला को बचाने की दिशा में भी प्रयास कर रही हैं। क्षेत्रीय कारीगरों के सहयोग से विद्यार्थियों को पारंपरिक उत्पाद बनाना सिखाया जाता है। पंचायत की महिलाओं और विद्यार्थियों को भी इस कला से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। इससे पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने के साथ गांव की महिलाओं को आजीविका कमाने का अवसर मिल रहा है।
पुरस्कार व शोध कार्य
- फरवरी 2025 में चौधरी केहर सिंह एजुकेशन ट्रस्ट ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया।
- वर्ष 2025 में भलेठ स्कूल को पर्यावरण संरक्षण एवं अपशिष्ट प्रबंधन में सराहनीय कार्य के लिए पुरस्कार मिला।
- वर्ष 2026 में भलेठ स्कूल को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन में उत्कृष्ट कार्य के लिए हिमाचल सरकार ने पर्यावरण नेतृत्व अवार्ड दिया।
- द जर्नल आफ आर्किड सोसाइटी आफ इंडिया में कई शोध प्रकाशित हुए।
एक शिक्षक के लिए विद्यार्थी तैयार करना महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के साथ संस्कार देना भी जरूरी है। हम पढ़ाई के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जागरूक कर रहे हैं। मैंने जीवन में कोई भी काम पुरस्कार पाने के लिए नहीं, एक अच्छा विद्यार्थी तैयार करने के लिए किया। — मंजरी वी. महाजन, प्रधानाचार्य
