संवाद सहयोगी, हमीरपुर : बस स्टैंड के खोखा धारकों को पिछले 15 दिनों शुक्रवार को नगर परिषद द्वारा दूसरा नोटिस पत्र थमा दिया है। नगर परिषद द्वारा बस अड़्डे के बाहर 52 खोखा धारकों पर संकट के बादल मंडराना शुरू हो गए हैं। वर्ष 1982-83 में बस स्टैंड के खोखा धारकों को को शैडनुमा खोखों का निर्माण किया गया है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन खोखा धारकों को अपना रोजगार चलाने के लिए आबंटित किया था। पूर्व भाजपा सरकार के समक्ष खोखा धारकों ने पक्का करने की मांग कर रहे थे। पिछले कई सालों से बस स्टैंड से खोखा धारकों को खेल मैदान में बने खोखों में शिफ्ट करने की अपील कर रहे हैं। पहला नोटिस पत्र 30 सितंबर को जारी किए गए थे, दूसरा नोटिस पत्र तीन अक्टूबर को जारी होने से खोखा धारकों की चिता और बढ़ गई है। पिछले 30-35 वर्ष से अपनी परिवारों का पालन पोषण कर रहे खोखा धारक अब दिन रात में पेशोपेंश में है। शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम शहर में एक बड़ी घटना के कारण टल गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री धर्मशाला रवाना होने के लिए वाया सुजानपुर निकल गए। वहीं खोखा धारकों के पास नगर परिषद द्वारा लाइसेंस भी हैं। जो इस बात को दर्शाता है की खोखा धारक ही इस स्थान पर अपनी मालिकाना के सही हकदार हैं। खोखाधारक 35 वर्ष को खोखा धारक नगर परिषद को किराये का भुगतान कर रहे हैं।

वहीं, नगर परिषद हमीरपुर के कार्यकारी अधिकारी केएल ठाकुर ने बताया कि वे कार्यशाला को लेकर दिल्ली में गए हुए हैं। खोखा धारकों को अपना सामान शिफ्ट कर लेना चाहिए।

Posted By: Jagran

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