संवाद सहयोगी, हमीरपुर : प्रदेश डिपो संचालक समिति का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जंजैहली में मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को डिपोधारकों व सहकारी सभा के विक्रेताओं को आ रही समस्या के बारे में अवगत करवाया।

प्रदेश डिपो संचालक समिति के अध्यक्ष अशोक कवि ने बताया कि समिति द्वारा कई बार प्रतिवेदन दिया। लेकिन उसपर कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेश पर डिपोधारकों के लिए ठोस नीति बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए थे। लेकिन उसपर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। समिति पुन: आग्रह करती है कि प्रतिवेदन में उठाए गए पदों पर विचार कर उचित निर्णय लें।

उन्होंने कहा कि निजी डिपो धारकों को एपीएल के राशन पर मात्र तीन प्रतिशत कमीशन मिल रहा है उससे कहीं अधिक डिपो धारकों को दुकान का किराया देना पड़ता है। प्रदेश के 90 प्रतिशत सहकारी सभाएं भी अपने विक्रेताओं को 500 से 2000 रुपये मासिक वेतन दे रही है। इतने कम कमीशन व वेतन पर परिवार का पालन पोषण करना संभव नहीं है। जेएंडके, केरल, गोवा व तमिलनाडू सरकारों की तर्ज पर सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।

खाद्य आपूर्ति निगम के प्रदेशभर में 90 प्रतिशत गोदामों से डिपोधारकों को राशन तोलकर नहीं दिया जाता है। जिससे डिपो धारकों को राशन पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कार्पोरेशन डिपू धारकों से वारदाने के पैसे वसूल करती है। जिसे एफसीआइ कारपोरेशन को वारदाना मुफ्त में देती है अत: डिपो धारकों को वारदाना मुफ्त में दिया जाए।

निजी डिपो धारकों व सहकारी सभाओं को 2013 से लेकर 2017 तक एनएफएसएस के राशन पर बढ़ा हुआ 27 महीनों का कमीशन केंद्र सरकार के पास लंबित पड़ा है। इसलिए केंद्र सरकार के पास पक्ष रखकर कमीशन दिलाया जाए।

डिपो धारकों को एफएसएसएआइ के लाइसेंस की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। निजी डिपोधारको व सहकारी सभाओं के विक्रेताओं को शॉर्टेज का प्रावधान किया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आग्रह किया कि डिपोधारकों के लिए ठोस नीति बनाकर समस्याओं का समाधान किया जाए।

Posted By: Jagran