धर्मशाला, जेएनएन।  आखिरकार चार साल बाद इराक के मोसुल में आइएस आतंकियों की बर्बरता का शिकार हुए हिमाचल के चारों युवकों का मंगलवार को उनके पैतृक गांवों में अंतिम संस्कार किया गया। इनमें कांगड़ा जिले के तीन व मंडी जिले का एक युवक शामिल था। मंगलवार को मारे गए युवकों के अवशेष घर पहुंचते ही माहौल इतना गमगीन हो गया कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की हर व्यक्ति की आंख से आंसू छलक पड़े।

 

उपमंडलीय अस्पताल नूरपुर व डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में रखे चारों युवकों के अवशेष मंगलवार सुबह स्थानीय प्रशासन के सहयोग से उनके घरों तक पहुंचाए गए। एसडीएम व  राजस्व विभाग केअधिकारी की मौजूदगी में ताबूत में बंद अवशेष परिजनों के सुपुर्द किए गए। अवशेष गांव में पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का रोरो कर बुरा हाल था। कांगड़ा के फतेहपुर उपमंडल के गांव समकड़ निवासी संदीप सिंह राणा को उनके बेटे छह वर्षीय अंश व उपमंडल देहरा की पंचायत भटेहड़ के गांव कदरेटी के इंद्रजीत को उनके आठ वर्षीय भतीजे पीयूष ने मुखाग्नि दी। उपमंडल धर्मशाला के पासू गांव के अमन को उनके भाई रमन व मंडी के सुंदरनगर उपमंडल के गांव बायला के हेमराज को उनके आठ वर्षीय बेटे धु्रव ने मुखाग्नि दी। सैकड़ों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

एजेंट के खिलाफ हो कार्रवाई

पीडि़त परिजनों ने 39 परिवारों के साथ अन्याय करने वाले एजेंट के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई है। परिजनों के मुताबिक जिन देशों के हालात इराक की तरह हैं, वहां जाना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर देना चाहिए। लोगों से अपील है कि विदेश जाने से पहले सभी औपचारिकताओं को पूरा करें। जाने से पहले एजेंट की पूरी जानकारी ले लें। जो हमारे जिगर के टुकड़ों के साथ हुआ है ऐसा आघात किसी और को न सहना पड़े।

आश्रितों को 10-10 लाख देगी केंद्र सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इराक में मारे गए 39 भारतीयों में से हर एक के आश्रित को 10 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने की घोषणा की है। यह जानकारी मंगलवार को सरकारी सूत्रों ने दी है। हिमाचल के भी चार युवक इराक में मारे गए थे, जिनका मंगलवार को ही अंतिम संस्कार किया गया। इराक में मारे गए 39 भारतीयों में से 38 की अस्थियों की पहचान की जा चुकी है और एक की अस्थियां अभी तक नहीं मिल पाई है। मारे गए सभी 38 लोगों की अस्थियां एक दिन पहले सोमवार को विशेष विमान से यहां लाया गया और उन्हें उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया। इराक में काम करने वाले 40 भारतीय श्रमिकों में से 39 की आतंकी समूह आइएस ने हत्या कर दी। एक श्रमिक खुद को बांग्लादेश का मुस्लिम बताकर आइएस के चंगुल से भाग निकलने में कामयाब रहा। मारे गए 39 भारतीय श्रमिकों में 27 पंजाब के थे। 

चार हिमाचल प्रदेश के, छह बिहार के और दो पश्चिम बंगाल के थे। आइएस आतंकियों ने सभी भारतीय श्रमिकों का अपहरण कर लिया था और लंबे समय तक उनके जीवित होने को लेकर भ्रम बना रहा। इराक में आइएस के पराजित होने के बाद खोज शुरू हुई और कब्र से मिली अस्थियों की जांच से उनके मारे जाने की पुष्टि है।

 

यह था मामला

इराक के मोसुल हिमाचल के चार युवकों को आइएसआइएस आतंकियों द्वारा 2014 में बंदी बनाया गया था। अपहरण के बाद उन्हें छुड़वाने के लिए केंद्र द्वारा कई आश्वासन भी दिए गए, लेकिन उनकी सकुशल वापसी नहीं हो सकी। 20 मार्च 2018 संसद में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनके मारे जाने की पुष्टि की। इसके बाद उनके अवशेषों को भारत लाने की कवायद शुरू हुई थी। 2 अप्रैल को 39 भारतीय के साथ मारे गए हिमाचल के चार युवकों के अवशेषों को विमान से अमृतसर पहुंचाया गया था, उसकी दिन शाम तक अवशेष हिमाचल पहुंचाए गए और तीन अप्रैल को उनका अंतिम संस्कार किया गया।

 

Posted By: Babita

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