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केंद्रीय बजट में हिमाचल के लिए माउंटेन ट्रेल की घोषणा, पर्यटन को कैसे मिलेगा बढ़ावा? यह है राज्य का सबसे लंबा ट्रैक

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 01 Feb 2026 01:21 PM (GMT+05:30)

Mountain Trail Himachal, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए माउंटेन ट्रेल की ...और पढ़ें

केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए माउंटेन ट्रेल की घोषणा की गई है। प्रतीकात्मक फोटो

केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए माउंटेन ट्रेल की घोषणा की गई है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. केंद्रीय बजट 2026-27 में हिमाचल के लिए माउंटेन ट्रेल घोषित।

  2. यह पहल हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगी।

  3. पिन पार्वती घाटी का 110 किमी ट्रैक राज्य का सबसे लंबा।

जागरण टीम, धर्मशाला। Mountain Trail Himachal, हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्रीय बजट में पहली घोषणा सामने आ गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए माउंटेन ट्रेल का एलान किया है। पर्यटन राज्य के लिए घोषणा अहम रहने वाली है। माउंटेन ट्रेल से हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। 

लंबे ट्रैकिंग रूट को इसमें शामिल किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश सरकार इस संबंध में प्रस्ताव भेजेगी। इसके बाद केंद्र सरकार से स्वीकृति व बजट मंजूर होगा। बजट आने के बाद चुनिंदा ट्रैक को विकसित किया जाएगा।

क्या है माउंटेन ट्रेल

पहाड़ी या जंगली इलाकों के बीच से गुजरने वाला एक संकरा, कच्चा रास्ता या पगडंडी होती है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से हाइकिंग (पैदल यात्रा), ट्रैकिंग, माउंटेन बाइकिंग या घुड़सवारी के लिए किया जाता है। यह प्रकृति के बीच रोमांच और सुंदर दृश्यों तक पहुंचने का एक साधन है, जो सीधी खड़ी पहाड़ियों या दुर्गम रास्तों से होकर गुजरती है।

हिमाचल का सबसे लंबा ट्रैक

हिमाचल प्रदेश का सबसे लंबा ट्रैक पिन पार्वती घाटी में है। 110 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक मणिकर्ण से शुरू होता है और लाहुल घाटी तक जाता है। इसमें पार्वती दर्रा सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसकी ऊंचाई 5400 मीटर तक है।

धौलाधार रेंज में सबसे ज्यादा ट्रैकिंग रूट

जिला कांगड़ा की धौलाधार रेंज में सबसे ज्यादा 17 ट्रैकिंग रूट हैं। धौलाधार की पहाड़ियों में शाहपुर के धारकंडी से लेकर बड़ा भंगाल तक ट्रैकिंग रूट हैं। इनमें पांच जोखिम भरे, तीन कम जोखिम वाले, जबकि नौ सरल ट्रैकिंग रूट हैं।

जिला कांगड़ा के ये आसान ट्रैकिंग रूट 

सरल ट्रैकिंग रूट में नड्डी-करेरी वाया रावा एक दिन। सतोवरी घेरा-करेरी एक दिन। बोह-खबरू वाया चंदरेला-दरकुंड एक दिन। इंद्रुनाग-भंगरोटू करथानी-त्रियुंड दो दिन। उतराला-जालसू दो दिन। बिलिंग-राजगुंधा-लोहारड़ी-ज्वारा दो से तीन दिन। सरी पास बीड़-बिलिंग-राजगुंधा एक दिन। खड़ौता-ठठारना एक दिन। नड्डी-गुणा टैंपल एक दिन।

ये हैं जोखिम भरे ट्रैक

वहीं, कम जोखिम भरे ट्रैक रूट में करेरी लेक वाया बलेनी पास मिनकैनी-मैहला चार से पांच दिन। जदरांगल-करडियाणा-भौंट हिमानी चामुंडा दो दिन। गज पास घेरा-बोंठू चार दिन। इसके अलावा जोखिम भरे ट्रैक में टंग नरवाणा-खेतल अलूड-हिमानी चामुंडा बर्ड्स पैराडाइज तीन से चार दिन। जिया सूपधार-तालंग लेक तीन दिन। राजगुंधा-थमसर-बड़ा भंगाल छह से सात दिन। गलू-धर्मकोट-होली-मणिमहेश छह दिन। सेवन लेक धौलाधार रेंज पांच से सात दिन शामिल हैं।

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