बनोई (धर्मशाला), जेएनएन। अद्र्धसैनिक बलों के जवानों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इन्होंने शैक्षणिक योग्यता पूरी न करने पर एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) स्कीम का लाभ न देने को चुनौती दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल सहित देश के सभी अर्धसैनिक बलों (एसएसबी, सीआरपीएफ, बीएसएफ और असम राइफल्स) की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ के न्यायाधीश मदन बी लोकुर और न्यायाधीश दीपक गुप्ता के सामने रविंद्र सिंह किश्तवाड़िया सीडी-जीडी एसएसबी बनाम भारत सरकार की एसएलपी नंबर  44727/2017 की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण व विनोद शर्मा ने अदालत को बताया कि अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त जवानों के साथ विभाग भेदभाव ठीक नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। इन दलीलों को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार को आठ सप्ताह में जवाब देने का नोटिस जारी किया है। अधिवक्ता विनोद शर्मा ने बताया कि यदि निर्णय अद्र्धसैनिक बलों के जवानों के पक्ष में जाता है तो इससे देश के हजारों जवान लाभान्वित होंगे।

हिमाचल के चंबा जिले से रविंद्र सिंह किश्तवाड़िया, कांगड़ा जिले से रण सिंह, मंडी से नरोत्तम राम व हरियाणा के राम कुमार सिंह सहित अन्य जवानों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद शर्मा के माध्यम से याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि हिमाचल और देश के अन्य राज्य में हजारों अद्र्धसैनिक बल के जवान, जो भर्ती के समय दसवीं पास नहीं थे, अन्य सभी योग्यताओं को पूर्ण करते हुए एसीपी का लाभ लेने के हकदार थे। 

यह है मामला

केंद्र सरकार ने नौ अगस्त 1999 को उन कर्मचारियों को आर्थिक लाभ देने के लिए एसीपी स्कीम बनाई थी जो कर्मचारी नियमित रूप से 12 वर्ष की अवधि पूरी करता है वह पहली पदोन्नति का हकदार होगा जैसे नायक से हवलदार। अगले 12 वर्ष पूर्ण करने के बाद उन्हें दूसरी पदोन्नति मिलेगी जैसे हवलदार से सब इंस्पेक्टर। सरकार का इस स्कीम को लाने का मकसद यह था कि बहुत सारे अद्र्धसैनिक बल सिपाही के रूप में भर्ती होते थे। 25 से 30 वर्ष की नियमित सेवाओं के बाद सिपाही ही सेवानिवृत्त हो जाते थे। विभाग ने जो अद्र्धसैनिक बल दसवीं पास नहीं थे, को शैक्षणिक योग्यता पूर्ण न होने के कारण इस स्कीम से वंचित कर दिया। इस आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई तो न्यायालय ने भी विभाग के आदेश पर ही मुहर लगा दी थी।

By Babita