बर्फ से ढकी चोटियां और तारों भरा आसमान... कम बजट से लग्जरी सफर तक, चले आइए त्रियुंड-करेरी झील; ऐसे प्लान करें ट्रिप
हिमाचल प्रदेश में त्रियुंड और करेरी झील धौलाधार की बर्फ से ढकी चोटियों के बीच ट्रेकिंग और कैंपिंग का अद्भुत ...और पढ़ें
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त्रियुंड-करेरी झील का अद्भुत सफर। फोटो जागरण
HighLights
त्रियुंड और करेरी झील में धौलाधार के बीच ट्रेकिंग का अनुभव।
तारों भरी रात में कैंपिंग और पहाड़ों में सूर्योदय का आनंद लें।
मैक्लोडगंज में तिब्बती-हिमाचली व्यंजन और हर बजट के आवास उपलब्ध।
दिनेश कटोच, धर्मशाला। धौलाधार की बर्फ से ढकी चोटियों, देवदार और ओक के घने जंगलों, झरनों तथा शांत प्राकृतिक वातावरण के बीच ट्रेकिंग का आनंद लेना है तो हिमाचल प्रदेश के त्रियुंड और करेरी झील चले आइए। धौलाधार के शानदार नजारे देखने वालों के लिए त्रियुंड आकर्षण का केंद्र है।
प्राकृतिक वातावरण पसंद करने वाले पर्यटकों को करेरी झील रोमांचित करती है। यहां ट्रेकिंग के साथ कैंपिंग, तारों भरे आसमान के नीचे रात बिताना और सुबह पहाड़ों के बीच सूर्योदय देखना यात्रा को यादगार बना देता है।
समुद्र तल से लगभग 2975 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रियुंड लोकप्रिय ट्रैक है। त्रियुंड जाने के लिए दो रास्ते हैं। धर्मकोट से लगभग सात किलोमीटर और गल्लू मंदिर की ओर से लगभग पांच किलोमीटर दूर है। ये ट्रैक जंगलों से गुजरते हैं।
ट्रेकिंग के दौरान कांगड़ा घाटी का खूबसूरत व धौलाधार की बर्फ से ढकी चोटियां रोमांचित करती हैं। त्रियुंड में कैंपिंग के दौरान खुले आसमान के नीचे रात बिता सकते हैं। सुबह धौलाधार की चोटियों से उगता सूरज पर्यटकों को प्रकृति के करीब ले जाता है।
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करेरी झील जंगल और पहाड़ों का संगम स्थल
करेरी मीठे पानी की झील है। यहां जाने के लिए सड़क मार्ग से करेरी गांव पहुंचना होता है। करेरी गांव से शुरू होने वाला लगभग 13 किलोमीटर लंबा ट्रैक जंगलों और प्राकृतिक जलधाराओं से होकर गुजरता है। झील के समीप भगवान शिव और शक्ति को समर्पित मंदिर हैं।
दिसंबर से मार्च के बीच झील का पानी जम जाता है। दिनभर पहाड़ी रास्तों पर चलने के बाद कैंप में रात बिताना और अगले दिन झील व आसपास की चोटियों के बीच सूर्योदय देखना खास अनुभव बन सकता है।

मौसम देखकर ही बनाएं ट्रेकिंग की योजना
त्रियुंड और करेरी की यात्रा में मौसम की महत्वपूर्ण भूमिका है। सर्दियों में बर्फबारी के कारण रास्ते कुछ चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। विशेष रूप से करेरी झील की ओर जाने वाले मार्ग पर बर्फ और कम तापमान के कारण अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। इसलिए ट्रेकिंग पर निकलने से पहले मौसम का पूर्वानुमान और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी देखना जरूरी है।

ट्रेकिंग के दौरान यह ध्यान रखें
ट्रेकिंग पर जाने वाले पर्यटकों को अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग जूते, गर्म कपड़े, रेन जैकेट, पर्याप्त पानी, जरूरी दवाएं, टार्च और पावर बैंक साथ रखना चाहिए। पहली बार ट्रेकिंग करने वालों के लिए स्थानीय गाइड की सहायता लेना बेहतर है।

इन पर्यटन स्थलों का भी कर सकते हैं भ्रमण
मैक्लोडगंज स्थित त्सुगलाखंग परिसर को दलाई लामा मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह तिब्बती संस्कृति और बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र है। यहां श्रद्धालु और पर्यटक प्रार्थना चक्र, मंदिर परिसर और शांत वातावरण का अनुभव करते हैं। भागसूनाग मंदिर भगवान शिव को समर्पित प्राचीन धार्मिक स्थल है।
मंदिर के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ी वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। भागसूनाग से कुछ दूरी पर स्थित जलप्रपात पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। मैक्लोडगंज और धर्मशाला के बीच जंगल के बीच स्थित चर्च अपनी पुरानी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मैक्लोडगंज के पास स्थित डल लेक चारों ओर देवदार के पेड़ों से घिरी सुंदर झील है।

कैसे पहुंचें?
पर्यटक कांगड़ा एयरपोर्ट (गगल) तक हवाई जहाज से पहुंच सकते हैं। धर्मशाला तक टैक्सी व बस सेवा है। ट्रेन से आना चाहते हैं तो ऊना के अंब या पठानकोट तक आ सकते हैं। अभी कांगड़ा घाटी रेलसेवा बंद है। दिल्ली या चंडीगढ़ से बस या टैक्सी से भी धर्मशाला पहुंच सकते हैं।
धर्मशाला पहुंचने के बाद करीब 10 किमी दूर मैक्लोडगंज है। यहां पहुंचने के बाद करीब एक किमी दूर धर्मकोट पहुंचना होगा। करेरी के लिए धर्मशाला से करीब पांच किमी दूर चड़ी गांव पहुंचें। इसके बाद करीब पांच किमी दूर करोरी गांव है। दोनों जगहों के लिए निजी साधन के साथ है टैक्सी से पहुंचा जा सकता है।

तिब्बती से हिमाचली व्यंजनों का लें स्वाद
मैक्लोडगंज में घूमने के साथ-साथ अलग-अलग व्यंजनों का आनंद भी ले सकते हैं। तिब्बती संस्कृति के प्रभाव के कारण यहां मोमोज, थुकपा, शाफले और तिब्बती नूडल्स काफी लोकप्रिय हैं। तिब्बती मक्खन वाली चाय भी पर्यटकों के लिए अलग स्वाद का अनुभव देती है।
मैक्लोडगंज और आसपास के क्षेत्रों के ढाबों व रेस्तरां में हिमाचली धाम, राजमा-चावल, कढ़ी-चावल, सिड्डू और मक्की की रोटी-साग जैसे स्थानीय व्यंजन भी मिलते हैं।
700 रुपये से लेकर 25 हजार के कमरे
मैक्लोडगंज में ठहरने के लिए कम बजट से लेकर लग्जरी होटल और रिजार्ट उपलब्ध हैं। साधारण कमरे 700 से 1200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिल जाते हैं।
लग्जरी श्रेणी के होटलों में 10 से 20 हजार रुपये या इससे अधिक एक दिन के खर्च करने पड़ सकते हैं। कुछ रिजार्ट में किराया 25 हजार रुपये या उससे अधिक तक भी है। होटल का किराया पर्यटन सीजन, सप्ताहांत, कमरे की श्रेणी और बुकिंग के अनुसार बदलता रहता है।
